सिरसी में अलम के जुलूस में मातम करते अजादार। संवाद
- फोटो : मानकविहीन पाए गई मिठाई व अन्य खाद्य पदार्थों को नष्ट करातीं सहायक आयुक्त खाद्य प्रियंका सिंह।
संभल। नवासा-ए-रसूल हजरत इमाम हुसैन के चेहलुम पर सफर के महीने में अजादारी का सिलसिला और तेज हो गया है। सिरसी के इमाम बारगाहों और अजाखानों में मजलिसों का सिलसिला जारी है। इस दौरान शबीहे जुलजुनाह और अलम मुबारक के जुलूस निकाले गए। जिससे माहौल और गमगीन हो गया। इमाम बारगाह हजरत कासिम में आयोजित दस दिवसीय मजलिसों को मेरठ से आए मौलाना हसीन अख्तर ने संबोधित किया। दूसरी ओर, अजाखाने शाहिद हुसैन में हुई मजलिस में मर्सिया खाबर रजा और उनके साथियों ने पढ़ा। मजलिस में मारूफ सिरसवी ने हजरत इमाम हुसैन के भाई और हजरत अली के बेटे हजरत अब्बास अलमदार की वीरता बयान की। कहा कि ऐसे वीर को यजीद की जालिम फौज के एक सिपाही ने छिपकर पीछे से वार करके उनके दोनों बाजुओं को काट दिया था, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे और नहरे फरात के किनारे शहीद हो गए थे।
मजलिस के बाद हजरत अब्बास अलमदार के बेटे का शबीहे जुलजुनाह का जुलूस बरामद हुआ। इसमें स्थानीय अंजुमनों ने नोहा पढ़ा और मातम किया। जुलूस में छोटे छोटे बच्चों ने जंजीर का मातम किया।
दूसरी ओर, मोहल्ला शर्की में लईक हसन मुतवल्ली के अजाखाने में हुई मजलिस को मौलाना महजर अली ने खिताब करते हुए हजरत इमाम हुसैन के फजाइल और मसाइब बयान किए। मजलिस के बाद अलम मुबारक का जुलूस बरामद हुआ। जिसमें अंजुमनों ने नोहाख्वानी की। जुलूस इमाम बारगाह मोहल्ला शर्की सादात पहुंचकर समाप्त हुआ।