ऐतिहासिक व धार्मिक महत्व है संभल का
संभल ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व से भरा हुआ शहर है। जितना महत्व ऐतिहासिक तौर पर राजपूत और मुगलों से जोड़कर दिया जाता है। उससे कहीं ज्यादा महत्व धार्मिक नजरिए से भी दिया जाता है। स्कंद पुराण में उल्लेख है कि कलियुग में भगवान कल्कि संभल में अवतरित होंगे। इसी मान्यता को जोड़कर संभल को देखा जाता है। वंशगोपाल तीर्थ में भगवान श्रीकृष्ण एक रात ठहरे थे और कदंब के वृक्ष के नीचे विश्राम किया था।
इन सभी मान्यता को जोड़ने से महत्व ज्यादा बढ़ जाता है। संभल महात्म्य में सभी तीर्थों और कूपों की एक-दूसरे से दिशा और दूरी दर्ज है। गंगा से दूरी और भगवान कल्कि का अवतरण होने वाले स्थान के बारे में भी उल्लेख किया गया है। शहर के मोहल्ला कोटपूर्वी स्थित प्राचीन कल्कि विष्णु मंदिर सदियों पुराना है।
इसकी देखभाल 250 वर्ष से मध्य प्रदेश के अहिल्याबाई होलकर ट्रस्ट द्वारा की जा रही है। कल्कि विष्णु मंदिर के पुजारी पंडित महेंद्र शर्मा का कहना है कि वह एएसआई द्वारा संरक्षित किए जाने की मांग करते चले आ रहे हैं। इस मंदिर की बनावट भी इसके प्राचीन महत्व को दर्शाती है। कहा कि इस मंदिर की कार्बन डेटिंग कराई जाए। जिससे इसके काल की सही जानकारी सामने आ जाएगी।