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Sambhal News: एबीसी सेंटर अटका, आवारा कुत्तों का बढ़ा आतंक

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चंदौसी। आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक के बीच नगर व आसपास के क्षेत्र में डॉग बाइट के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन कुत्तों की नसबंदी योजना अब तक शुरू नहीं हो सकी है। एबीसी सेंटर के लिए जमीन चयन की प्रक्रिया महीनों से अटकी हुई है। पालिका द्वारा लगातार पत्राचार और तैयारियों के बावजूद नसबंदी अभियान फाइलों से बाहर नहीं निकल पाया है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
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भीषण गर्मी में आवारा कुत्तों का व्यवहार ज्यादा आक्रामक होता जा रहा है। शहर के कई इलाकों में कुत्तों के हमला करने और काटने की घटनाएं बढ़ रही हैं। इसके बावजूद नगर पालिका अब तक एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) सेंटर के लिए जमीन तय नहीं कर सकी है, जिससे नसबंदी अभियान शुरू नहीं हो पा रहा है। पालिका स्तर पर एबीसी सेंटर स्थापित करने की कवायद पिछले कई महीनों से चल रही है। इसके लिए डेढ़ एकड़ जमीन की मांग भी प्रशासन से की जा चुकी है, लेकिन अब तक उपयुक्त स्थान नहीं मिल सका है।
अधिकारियों का कहना है कि ऐसी जगह की तलाश की जा रही है, जहां कुत्तों को रखने, ऑपरेशन और देखभाल की समुचित व्यवस्था हो सके। इधर आवास विकास में मां एनिमल्स संस्था के सहयोग से एक छोटा सेंटर संचालित किया जा रहा है। यहां बीमार और घायल गायों को लाकर उनका इलाज कराया जाता है। हालांकि, इस सेंटर में कुत्तों को रखने या उनकी नसबंदी की कोई व्यवस्था नहीं है। लगातार बढ़ रहे डॉग बाइट के मामलों के बीच नसबंदी योजना शुरू न होने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। अस्पतालों में एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने वालों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है।
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सीएचसी में रोजाना आ रहे 150-200 रैबीज के मरीज
सीएचसी में डॉग बाइट के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यहां प्रतिदिन 150 से 200 लोगों को एंटी रैबीज वैक्सीन लगाई जा रही है। सबसे ज्यादा मरीज ग्रामीण इलाकों से पहुंच रहे हैं। मरीजों का कहना है कि गांवों में आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ता जा रहा है। कई जगह कुत्ते झुंड में घूमते हैं और राह चलते लोगों पर हमला कर देते हैं। बच्चों और बुजुर्गों पर हमले के मामले अधिक सामने आ रहे हैं, जिससे लोगों में डर का माहौल बना हुआ है।

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एबीसी सेंटर नगर निगम में बनाया जाना है। हालांकि जनपद में अभी उसके लिए कोई भूमि चिह्नित नहीं हुई है। फिलहाल चंदौसी में आवास विकास कॉलोनी में मिनी एबीसी सेंटर बनाया गया है। जहां संबंधित चिकित्सक न होने से नसबंदी का कार्य नहीं होता है।
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- प्रियंका सिंह, सेनेटरी इंस्पेक्टर, पालिका चंदौसी।
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