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Sambhal News: तालाब की भूमि पर बने 80 मकान, हटाने के लिए 40 पर लगाए गए लाल निशान

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संभल के हातिम सराय में मकान पर निशान लगाते कर्मचारी।
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संभल। रायसत्ती थाना क्षेत्र के मोहल्ला हातिम सराय में तालाब की भूमि पर बने 80 मकानों को ढहाने की तैयारी प्रशासन ने शुरू कर दी है। मंगलवार को तहसीलदार धीरेंद्र सिंह ने टीम के साथ मौके पर पहुंचकर 40 मकानाें पर लाल निशान लगवा दिए। तहसीलदार का कहना है कि सरकारी तालाब पर कब्जा कर मकानों का निर्माण किया गया है। टीम ने 40 मकानों पर लाल निशान लगा दिए हैं। तीन दिन पहले 45 लोगों को नोटिस भी जारी किए जा चुके हैं। अवैध बने मकानों को हटाया जाएगा।मोहल्ला हातिम सराय में वर्षों पहले तक यह आठ बीघा भूमि में तालाब था जहां वर्तमान में मकानों का निर्माण कर लिया गया है। प्रशासन ने जांच पड़ताल की तो यह 80 मकान तालाब की भूमि पर निर्माण पाए गए। इन मकान स्वामियों को भूमि खाली करने के लिए नोटिस जारी किए गए थे। इसी क्रम में अब लाल निशान लगाकर ढहाने की तैयारी की जा रही है। तहसीलदार ने बताया कि 15 दिन का समय मकान हटाने के लिए दिया गया है। यदि लोग खुद नहीं तोड़ते हैं तो प्रशासन की ओर से कार्रवाई की जाएगी। राजस्व की टीम ने करीब दो घंटे तक निशान लगाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।
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तहसीलदार ने बताया कि तालाब की भूमि पर लोगों के मकान बने हैं। लोगों को भी यह नहीं मालूम है कि जिसने भूमि बेची है वह कौन है। लोगों से कहा गया है कि वह तहसील आकर लिखित में बताएं कि भूमि किसने बेची थी और किस तरह खरीदी गई।
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सिस्टम की नाकामी और भूमाफिया के खेल में फंस गए मजदूर पेशा लोग
करीब 10 से 12 वर्ष पहले इस तालाब को पाटकर प्लॉटिंग कर दी गई। इसकी जानकारी लोगों को हुई जरूर लेकिन जब सिस्टम की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई तो लोग इस झांसे में आ गए कि यह तालाब निजी है, जिसको पाट लिया गया है। इसके बाद लोगों ने भूमाफिया से प्लॉट खरीद लिए और मेहनत मजदूरी कर मकानों का भी निर्माण कर लिया गया। हैरानी की बात यह है कि तालाब पाटने से लेकर प्लॉटिंग करने तक सिस्टम को इसकी जानकारी नहीं हुई। अब प्रशासन ने तोड़ने के लिए नोटिस जारी कर दिए गए हैं। इन परिवारों की पूरी मेहनत की कमाई खत्म होने की कगार पर पहुंच गई है। यह सिस्टम की नाकामी और भूमाफिया का जाल है। जिसका यह लोग शिकार हुए हैं।
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तालाब की जमीन के बैनामे कैसे हुए और क्यों दी गईं मूलभूत सुविधाएं
जिन लोगों के मकानों पर लाल निशान लगे हैं उनके गले सूख गए हैं लेकिन वह सवाल उठा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब यह सरकारी तालाब पाटा गया तो इसके बैनामे कैसे किए गए। सिस्टम ने धोखा कराया है। सभी के बैनामे हुए हैं। आगे कहा कि बिजली कनेक्शन से लेकर पानी की आपूर्ति, सड़क, नाली आदि की भी पूरी सुविधा पालिका द्वारा दी जा रही है। लोगों को कैसे जानकारी होती कि यह सरकारी भूमि है। भूमाफियाओं के साथ सिस्टम भी मिला हुआ था तभी बैनामे हुए और लोगों की जिंदगीभर की कमाई को हड़प लिया गया।
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बाशिंदे बोले-
हमें नोटिस जारी किया गया है। हम तो कागजों में मालिक हैं लेकिन प्रशासन की टीम कह रही है कि हमने सरकारी तालाब पर कब्जा कर लिया है। जबकि हमने तो खरीदी है। यदि सरकारी भूमि थी तो बैनामा कैसे हो गया।
-इब्राहिम, हातिम सराय
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हमें तो सारी सुविधाएं मिल रही हैं। गृहकर व जलकर भी जमा करते हैं। बिजली कनेक्शन भी हैं। अब हमें बताया जा रहा है कि हम सरकारी तालाब पर मकान बनाकर रह रहे हैं। हम लोगों की जिंदगीभर की कमाई लगी है।
-जुबैर, हातिम सराय
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तालाब की भूमि पर बने मकानों को लेकर लोगों को नोटिस देते हुए जवाब देने के लिए 15 दिन का समय दिया है। जवाब देते हैं या नहीं देते हैं दोनों ही स्थिति में 15 दिन के बाद ही कार्रवाई होगी। मकानों पर निशान भी लगा दिए गए।
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-धीरेंद्र कुमार सिंह, तहसीलदार संभल
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