फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

डा. बर्क को टिकट से सपा में फिर उभरे आंतरिक विरोध के स्वर

विज्ञापन
विज्ञापन
चंदौसी। डा. शफीकुर्रहमान बर्क के हर हाल में चुनाव लड़ने के एलान के बाद समाजवादी पार्टी ने सपा, बसपा रालोद गठबंधन का टिकट तो उन्हें थमा दिया लेकिन पार्टी में अंतर्विरोध के स्वर मुखर होने लगे हैं। इसलिए सपा को अपने गढ़ संभल में बड़े अंतर्कलह का सामना करना पड़ सकता है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सपा के शहर विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री इकबाल महमूद ने खुलकर कहा है कि पार्टी हाईकमान ने यह टिकट जनभावनाओं के अनुरूप नहीं दिया है। टिकट उसे दिया गया है जो पार्टी में ही नहीं है।
विज्ञापन

वह पहले अपने कार्यकर्ताओं, समर्थकों व अन्य पार्टी नेताओं से विचारविमर्श करेंगे, तभी चुनाव लड़ाने या नहीं लड़ाने का फैसला करेंगे।
संभल में डा. शफीकुर्रहमान बर्क और इकबाल महमूद के बीच सियासी जंग कोई नई नहीं है। दोनों कई बार एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ चुके हैं तो एक पार्टी में रहकर भी एक दूसरे का विरोध कर चुके हैं। 2002 के विधानसभा चुनाव में इकबाल महमूद सपा से तो डा. शफीकुर्रहमान बर्क राष्ट्रीय परिवर्तन दल के टिकट पर आमने-सामने चुनाव लड़े। 2007 में जब डा. शफीकुर्रहमान बर्क मुरादाबाद से सांसद थे, इसी समय विधानसभा चुनाव में सपा प्रत्याशी इकबाल महमूद के खिलाफ डा. बर्क ने अपने पुत्र ममलूकुर्रहमान को रालोद से चुनाव लड़ाया।
वर्ष-2009 में लोकसभा चुनाव में सपा के टिकट पर इकबाल महमूद व बसपा के टिकट डा. शफीकुर्रहमान बर्क फिर आमने सामने आए, जिसमें डा. बर्क चुनाव जीते। उसके बाद 2014 के चुनाव से पूर्व जावेद अली को सपा ने प्रत्याशी घोषित कर रखा था, लेकिन चुनाव आने पर जावेद अली के स्थान पर टिकट बसपा सांसद डा. शफीकुर्रहमान बर्क को थमा दिया।
विज्ञापन

इस समय इकबाल महमूद कैबिनेट मंत्री थे। इसमें इकबाल महमूद ने बर्क समर्थकों पर अपने आवास पर फायरिंग, पथराव का आरोप भी लगाया, जिसका मुकदमा भी लिखा गया। हालांकि इस चुनाव में काफी कम मतों से डा. बर्क भाजपा प्रत्याशी सत्यपाल सैनी से चुनाव हार गए थे। 2017 के विधान सभा चुनाव में सपा प्रत्याशी इकबाल महमूद के सामने डा. बर्क ने अपने पौत्र जियाउर्रहमान बर्क तो ओवैसी की पार्टी चुनाव लड़ाया था।
कुल मिलाकर संभल के चुनावी इतिहास में कई बार ऐसा मौका आया, जब डा. बर्क और इकबाल महमूद दोनों आमने-सामने आए। अब एक बार फिर चुनाव महा संग्राम शुरू हो गया है। इकबाल महमूद के पुरजोर विरोध के बावजूद सपा ने एक बार फिर डा. बर्क को टिकट दे दिया है तो इकबाल महमूद के स्वर तीखे हो गए हैं। इसके साथ ही समाजवादी पार्टी में अंतर्विरोध का खतरा प्रबल हो गया है।
-------------------------------------------------
सपा हाईकमान ने उन्हें टिकट दिया जो सपा में है ही नहीं। जो पार्टी के वफादार भी नहीं हैं। जिनका पार्टी से कोई मतलब नहीं है। जिले के अधिकांश सभी विधायकों सहित कई नेताओं ने डा. बर्क को टिकट देने पर ऐतराज जताया था, लेकिन इसके बावजूद उन्हें टिकट दिया है तो पहले सभी विधायकों, संगठन, अपने समर्थकों, कार्यकर्ताओं से राय मशविरा करूंगा, उसके बाद ही चुनाव लड़ाने या नहीं लड़ाने पर फैसला लूंगा।
विज्ञापन

-इकबाल महमूद, सपा विधायक संभल
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें