बारिंग का जलस्तर घटने के बाद खाली खड़ा पंपिंग सेट।
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तालाब पट गए। पेड़ कट गए। नदियां गुम गईं। पानी की बर्बादी हो रही है। जल के परंपरागत स्रोत जवाब दे गए हैं। साल दर साल जल स्तर नीचे जा रहा है। कई इलाकों में बारिश न होने से जल स्तर में तेजी के साथ गिरावट दर्ज की गई है। एक वर्ष में पांच फीट तक जल स्तर घट रहा है। जनपद संभल के सात विकास खंड कई वर्ष से डार्क जोन में हैं। विभिन्न स्थानों पर बोरिंग फेल हुए हैं। फसलों पर संकट है।
कभी नदियों की गोद में खेलने वाले संभल में अब जल संकट का खतरा बढ़ रहा है। अगर अब नहीं चेते तो जमीन का जल जवाब दे जाएगा और आने वाली पीढ़ियां पानी के लिए तरसेंगी। हालात ही कुछ ऐसे हैं। संभल जिले की बात करें तो पिछले छह वर्ष में जमीन का जल स्तर 25-30 फीट तक नीचे जा चुका है। संभल जिले के नलकूप खंड में अधिशासी अभियंता शील त्रिपाठी ने बताया कि रजपुरा और गुन्नौर में गंगा किनारे के कुछ इलाकों को छोड़कर सभी विकास खंडों के क्षेत्र में इस समय जल स्तर 55-65 फीट तक की गहराई पर है। जबकि वर्ष 2012 में यह जल स्तर 25-35 फीट की गहराई पर था।
जाहिर है कि एक वर्ष में पानी 4-5 फीट नीचे जा रहा है। लगातार जल स्तर घटने से जिले में एक सौ से अधिक सरकारी नलकूप ऐसे हैं जो भरपूर पानी नहीं दे रहे हैं। कुछ नलकूपों ने पानी देना ही बंद कर दिया है। सरकारी ही नहीं गैर सरकारी नलकूप भी जल स्तर घटने से प्रभावित है। नलकूप ही क्यों, सबमर्सिबल पंप की बोरिंग भी गहराई तक करानी पड़ रही है। घरेलू हैंडपंप भी जल स्तर घटने से अछूते नहीं हैं।
जनपद में सिरसी और पवांसा ऐसे क्षेत्र हैं जहां पर जलस्तर ज्यादा घटा है। जबकि रजपुरा में जमीन का जलस्तर 25 फीट पर है। गुन्नौर के कुछ इलाकों में भी जलस्तर अच्छा है क्योंकि यह इलाका गंगा नदी के किनारे पर है जहां वाटर रिचार्ज की कोई समस्या नहीं है। असमोली, पवांसा, बनियाखेड़ा, संभल, बहजोई, जुनावई, गुन्नौर ब्लाक के कई इलाके ऐसे हैं जहां भारी मात्रा में जल दोहन हो चुका है। सातों विकास खंड कई वर्ष से डार्क जोन में हैं। हैरत की बात तो यह है कि डार्क जोन में भी जल दोहन जारी है। फिर हालात कैसे सुधरेंगे।