चिमनी से मजदूरों को नीचे उतारती क्रेन।
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आंधी बुधवार को असमोली में स्थित डीएसएम ग्रुप की चीनी मिल में आफत बनकर आई। आंधी देख मिल की चिमनी से मजदूर उतर ही रहे थे कि, जीना टूट गया। चीनी मिल की 40 मीटर ऊंची चिमनी में तीन मजदूर फंस गए। सूचना पर अफरा-तफरी मच गई।
पुलिस के साथ प्रबंधन को भी सूचना दी गई। इस बीच बुलाई गई 45 मीटर ऊंचाई तक काम करने वाली हाइड्रोलिक क्रेन से किसी तरह मजदूरों को सकुशल उतरा गया। ढाई घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलता रहा, तब तक सबकी जान पर बनी रही। तीनों के उतरने के बाद लोगों की जान में जान आई।
बुधवार को शाम करीब छह बजे आंधी चलने लगी। आंधी के वक्त डीएसएम शुगर मिल असमोली के परिसर में निर्माणाधीन चिमनी में आठ मजदूर काम कर रहे थे, हवा का रुख देख मजदूरों ने चिमनी के सहारे खड़े लोहे के जीने से उतरना शुरू कर दिया। पांच मजदूर उतर गए। इसी बीच अचानक लोहे का जीना टूटकर गिर गया।
चिमनी के ऊपर मौजूद तीन मजदूर झारखंड के सरोजनाथ मांझी, सोमनाथ मांझी और लक्सर के चांद मोहम्मद फंसे रह गए। जैसे ही यह खबर मिल प्रबंधन को मिली, तत्काल पुलिस और दमकल को खबर दी गई। संभल से दमकल पहुंची।
असमोली पुलिस और मिल प्रबंधन ने क्रेन का इंतजाम कराया। मेरठ से भी क्रेन बुलाने का प्रयास किया गया लेकिन इससे पहले 45 मीटर ऊंचाई तक काम कर सकने वाली क्रेन मिल गई। इसमें एक झूला बनाया गया जिससे एक मजदूर को इस झूले में बैठाकर ट्रायल लिया गया। जब दस फुट तक झूला क्रेन के सहारे सकुशल चला गया तो उस झूले को ऊपर तक भेजने का निर्णय लिया गया।
झूले में एक मजदूर को बैठाया गया, जो क्रेन को डायरेक्शन देता रहा। असमोली के थाना प्रभारी कुंजबिहारी मिश्र ने बताया कि दो घंटे तक चले रेक्क्यू में तीनों मजदूरों की जान सकुशल बच गई। लेकिन जब तक मजदूर उतर नहीं पाए थे तब तक उनकी जान को खतरा था। लेकिन अच्छी बात रही कि सभी मजदूरों की जान बच गई। आंधी से कई स्थानों पर पेड़ टूटकर गिरने की भी खबर है।