संभल। गरीबों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिले इसके लिए सरकारें प्रयासरत हैं। वहीं सस्ते दामों पर दवाईयों की ब्रिकी के लिए खोले गए जन औषधि केंद्र पर लगे ताले मरीजों को चिड़ा रहे हैं। जिससे सस्ते दामों में दवा खरीदने का सपना देखने वाले मरीजों को मजबूरन निजी मेडिकल पर जाना पड़ रहा है।
अगर केंद्र खुला भी मिल जाए तो दवा का स्टोक नहीं मिलता। लिहाजा गरीबों के लिए संचालित की जाने वाली योजनाओं को स्वास्थ्य विभाग पलीता लगा रहा है। शुक्रवार को अमर उजाला टीम ने हाल जाना तो नगर स्थित जन औषधि केंद्र का ताला लगने के कारण दर्जनों लोग भटकते नजर आए।
मरीज शील कुमार ने बताया कि वह कई बार दवाई लेने आए। लेकिन केंद्र हमेशा बंद ही मिलता है। अरविंद ने बताया कि जन औषधि केंद्र कभी कभार खुला मिलता है। लेकिन पूरी दवा नहीं मिल पाती। मजबूरन लोगों को बाजार मूल्य पर दवाई खरीदनी पड़ रही।
अगर खुले औषधि केंद्र तो पूरी नहीं मिलती दवा
संभल। जन औषधि केंद्र सरकार ने निम्न वर्ग की सहूलियत के लिए खुलवाए हैं। जिससे सरकारी दरों पर अच्छी दवाई उपलब्ध कराई जा सके। लेकिन कभी केंद्र बंद तो कभी दवाईयों के स्टॉक में कमी से लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा है।
अपनी जिम्मेदारी को नकार रहे अधिकारी
संभल। नगर के जिला अस्पताल में संचालित जन औषधि केंद्र के संचालन की जिम्मेदारी सीएमएस की है। जिसकी पुष्टि जिले की मुख्य चिकित्सा अधिकारी कर रहीं हैं लेकिन गैर जिम्मेदार रवैया अपनाने वाले सीएमएस डा. एके गुप्ता ने बताया कि जन औषधि केंद्र बंद रहता है या फिर खुला है इसकी जिम्मेदारी उनकी नहीं है।
सीएमओ बोलीं जांच कराएंगे
संभल। जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. अमिता सिंह ने बताया कि जिला अस्पताल में संचालित जल औषधि केंद्र सरकार की एक योजना है जो स्वास्थ्य विभाग के अधीन आती है। जिसके संचालन की जिम्मेदारी भी वहां के सीएमएस की है। अगर वह अपनी जिम्मेदारी से बच रहे हैं तो हम इसमें जांच कराके कार्रवाई कराएंगे। किसी भी सरकारी योजनाओं के लिए विभाग लापरवाही नहीं बरतेगा।