चंदौसी। गर्मियों के मौसम में हरी सब्जियां के भाव गिरने से किसान परेशान हैं। सब्जियों के दाम पहले से आधे से भी कम हो गए हैं। मंदी आने के पीछे मांग कम और आवक अधिक होना माना जा रहा है। लेकिन इससे मध्यम वर्ग को राहत मिली है। हालांकि अब एक बार फिर धीरे-धीरे भाव चढ़ने लगे हैं।
प्रतिवर्ष गर्मियों में हरी सब्जियों के भाव में तेजी आने की संभावना रहती है। क्योंकि इन दिनों जहां हरी सब्जियों की खपत बढ़ जाती है, साथ ही सब्जियों का उत्पादन भी भीषण गर्मी के कारण प्रभावित हो जाता है। लेकिन इस बार उल्टा हो रहा है।
तेजी आने की बजाय सब्जियों पर मंदी आ गई। आलम यह है कि इनके भाव पहले से आधे हो गए हैं। इसके बाद भी मंडी में जिस तरह से सब्जी की ब्रिकी होनी चाहिए, वह नहीं हो पा रही है। थोक भाव में तोरई दो सप्ताह पूर्व 15 से 20 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रही थी। अब यह तीन से छह रुपये प्रति किलोग्राम बिक रही है। जबकि लौकी 10 से 12 रुपये से लुढ़क कर दो से तीन रुपये प्रति किलोग्राम, करेला 18 से 20 रुपये लुढ़कर 10 से 12 रुपये प्रति किलो ग्राम बिक रहा है। भिंडी अभी तक 10 से 12 रुपये बिक रहा थी, जो अब पांच से 10 रुपये प्रति किलोग्राम, खीरा 15 से 20 रुपये से अब छह रुपये प्रति किलो ग्राम बिक रहा है। लेकिन अब इनके भाव में धीरे-धीरे सुधार आने लगा है। जबकि आलू व टमाटर के भाव स्थिर बने हुए हैं।
हरी सब्जियों में अचानक मंदी आने के पीछे मांग कम व आवक अधिक होना माना जा रहा है। आढ़ती उमेश शर्मा ने बताया कि मंडी में आसपास के अलावा दूर दराज क्षेत्र से भारी मात्रा में हरी सब्जियां आ रही हैं। इस कारण से भी हरी सब्जियों पर अचानक मंदी आ गई है। मंदी आने से किसान खासा निराश हैं। लेकिन बारिश शुरू होते ही हरी सब्जियों के भाव में तेजी आने की संभावना है।