संभल। नदी और तालाबों पर हुए अवैध कब्जों को हटाकर परंपरागत जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के संबंध में जिला प्रशासन गंभीर हो गया है। जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी को सक्रिय किया है। मुख्य विकास अधिकारी उमेश कुमार त्यागी गुरुवार को दोपहर बाद असमोली विकास खंड के मनोटा स्थित मुख्यालय पहुंचे। ब्लाक सभागार में उन्होंने ग्राम प्रधानों से सीधा संवाद किया।
किस गांव में मनरेगा के तहत क्या काम चल रहे हैं। इसकी जानकारी लेने के बाद उन्होंने कहा कि जिन गांवों से होकर सोत नदी गुजर रही है, उन गांवों के प्रधान, नदी की सफाई के लिए मिट्टी संबंधी कार्य के प्रस्ताव तैयार कराएं। तकनीकी जांच और जरूरत को देखते हुए ऐसे प्रस्ताव मंजूर किए जाएंगे ताकि सोत नदी एक बार फिर जीवित हो सके। बैठक में ग्राम प्रधानों ने मुख्य विकास अधिकारी को सहयोग देने तथा नदी को पुनर्जीवित करने की मुहिम में भागीदारी का संकल्प व्यक्त किया।
नदियों और तालाबों पर हुए अवैध कब्जों की ओर अमर उजाला ने अपने समाचारों के जरिए प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया था। जिलाधिकारी अविनाश कृष्ण सिंह ने नदियों और तालाबों को पुनर्जीवित करने के लिए बहजोई में अधिकारियों के संग सोमवार को बैठक की। बैठक में उन्होंने कहा था कि मंगलवार से काम शुरू कराएंगे। मंगलवार को उन्होंने सोत नदी के सीमांकन का काम कराया।
इसी क्रम में गुरुवार को मुख्य विकास अधिकारी उमेश त्यागी कुमार त्यागी ग्राम प्रधानों के साथ मनोटा स्थित असमोली के ब्लाक मुख्यालय पर बैठक की। बैठक में उन्होंने बताया कि नदियों को जीवित नहीं किया तो आने वाली पीढ़ियों को हम क्या जवाब देंगे। इस मौके पर प्रधानों ने कहा कि वह अपने अपने क्षेत्र में नदी की सफाई कराएंगे। नदी-नाले अवैध कब्जों से मुक्त कराएंगे। बैठक में खंड विकास अधिकारी शिखर श्रीवास्तव ने भी भाग लिया।