संभल। सिरसी की झील में असरदार लोगों ने अवैध कब्जे किए। राजस्व रिकार्ड में इसके लिए खेल किया गया है। यह बात सामने आ रही है। अवैध कब्जे हटाने के लिए उप जिलाधिकारी ने तहसीलदार को राजस्व रिकार्ड खंगालने के आदेश दिए हैं।
सिरसी में 11.4950 हेक्टेयर की झील है। इस झील की जमीन के कुछ हिस्सों को कब्जे में लेने के लिए वर्ष 1993 से खेल शुरू हुआ था। इसके लिए राजस्व अभिलेखों में खेल किया गया। फर्जी इंद्राज कराए गए। अवैध कब्जों के मामले जब उप जिलाधिकारी दीपेंद्र यादव के संज्ञान में आए तो उन्होंने कहा कि जो जलमग्न भूमि है, उसके स्वरूप में कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता है। अगर किसी ने इसके स्वरूप में छेड़खानी की है तो उसके खिलाफ कार्रवाई के प्रावधान है। उन्होंने बताया कि झील की जमीन को अवैध कब्जों से मुक्त कराने के बाद राज्य सरकार के पक्ष में दर्ज करने के लिए अब आदेश दिए गए हैं।
इसी मामले में तहसीलदार सुधीर कुमार ने बताया कि कुछ लोगों ने झील की जमीन को अवैध तरीके से अपने नाम चढ़वा लिया था। इसके लिए वर्षों पहले फर्जी इंद्राज कराए गए हैं। प्रारंभिक जांच के दौरान राजस्व अभिलेखों से इसकी पुष्टि हो रही है।
इसलिए अब झील के रकबे को झील के रूप में दर्ज करने के लिए प्रक्रिया शुरू की गई है। यह कोशिश की जा रही है कि पांच जून विश्व पर्यावरण दिवस से पहले ही प्रशासन झील पर अवैध तरीके से किए गए कब्जे हटाए जाने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दे। इसमें जो लोग बाधा बनेंगे उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। झील को पक्षी बिहार के रूप में विकसित किया जाएगा।
इसमें जो भी अवैध कब्जे हैं वह पुलिस को साथ लेकर हटाए जाएंगेे। झील और तालाब पर अवैध कब्जों के खिलाफ अमर उजाला ने जो अभियान छेड़ा था। उसके दौरान ही प्रशासन द्वारा अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसे देखते हुए स्थानीय नेता संजय सांख्यधर ने कहा कि यदि प्रशासन किसी दबाव में न आया तो जल स्रोतों की रक्षा होने लगेगी। अब लोग अवैध कब्जे करने से भी डरेंगे।