संभल। सरकारी क्रय केंद्रों पर पसरा सन्नाटा प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा रहा है। जहां एक ओर गेहूं की सरकारी खरीद का लक्ष्य पूरा करने का दबाव प्रशासन पर बना हुआ है वहीं दूसरी ओर किसान सरकारी क्रय केंद्रों को तवज्जो नहीं दे रहे हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि किसान बैंक बकाया वसूली से डरा हुआ है। यदि किसान के खाते में रुपये जमा होंगे तो बैंक ऋण की रकम काट लेगा। इसलिए किसान सीधे व्यापारी को बेचना पसंद कर रहा है। लेकिन किसान की इस पसंद के चलते प्रशासन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ऐसे में प्रशासन ने व्यापारियों पर भी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।
दरअसल संभल जिले के सभी सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं की खरीद बहुत कम औसत से चल रही है। ऐसे में प्रशासन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। एडीएम लव कुश त्रिपाठी जिले भर में भ्रमण कर क्रय केंद्रों का निरीक्षण कर रहे हैं।
साथ ही क्रय केंद्र प्रभारियों से लक्ष्य पूरा करने के लिए कहा जा रहा है। जिससे शासन को संतुष्ट रिपोर्ट भेजी जा सके। किसानों से भी संवाद किया जा रहा है। सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने के लिए अपील की जा रही है। लेकिन किसान क्रय केंद्र तक आना नहीं चाह रहा।
किसानों की माने तो छोटे किसानों ने बैंकों से लोन लिया हुआ है। यदि सरकारी क्रय केंद्र पर गेहूं बेचा तो रुपये सीधे खाते में आएंगे और बैंक अपनी रकम काट लेगा। ऐसे में जो उधार है वह कैसे पूरा होगा। इसलिए व्यापारी को सीधे बेचा जा रहा है। नकद भुगतान होता है। इसलिए किसान सरकारी क्रय केंद्रों को तवज्जो नहीं दे रहा।
फसल लगाने के साथ ही हो जाता है कर्ज का बोझ
मंडी समिति में मिले लाडम सराय निवासी किसान चमन सैनी ने बताया कि फसल लगाने के साथ ही किसान पर कर्ज का बोझ हो जाता है। ऐसे में सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचा जाएगा तो कई दिन में भुगतान होगा। बैंक का जो लोन निकल रहा है, वह उसको बैंक काट लेगा। इसलिए किसान सरकारी केंद्रों पर गेहूं बेचने से डर रहा है। यदि प्रशासन बैंकों से कहे कि किसान की मर्जी के बिना बकाया न काटा जाए तो किसान सरकारी केंद्रों पर ही गेहूं बेचने के लिए पहुंचेगा।