संभल। रमजान के मुबारक महीने में मीठी सिवईं की मांग खासतौर पर मुस्लिम परिवारों में हो रही है। इफ्तार और सहरी में रोजेदार सिवईं और जवे लेते ही हैं लेकिन सबसे ज्यादा मांग ईद के मौके पर होती है। संभल और हयात नगर सिवईं बनाने वालों के लिए खास है। यहां पर आठ कारखानों में मैदा से शानदार सिवईं तैयार की जाती है। इसकी भुनाई भठ्ठी में इस तरह से होती है कि जब सिवईं पकती तो महकती है। इसीलिए इसकी मांग आसपास के शहरों से ज्यादा मध्य प्रदेश और राजस्थान में है।
वैसे तो 26 रुपये प्रति किलोग्राम मैदा से तैयार होने वाली सिवईं बनकर 30-35 रुपये प्रति किलोग्राम तक थोक में बिकती है लेकिन फुटकर भाव 50-60 रुपये प्रति किलोग्राम है। भुनी हुई सिवईं के छोटे पैकेट भी हैं। एक पैकेट में 160 ग्राम सिवईं भरी जाती है जो थोक में छह रुपये का है पर फुटकर में दस रुपये प्रति पैकेट बिकता है। सिवईं निर्माता मोहम्मद शाकिर ने बताया कि संभल में आठ कारखाने हैं।
इनकी सिवईं उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों के साथ मध्य प्रदेश और राजस्थान भी जाती है। उनकी सिवईं का बड़ा हिस्सा अलीगढ़ में खपत होता है। अलीगढ़ के बाद आगरा मंडी है जहां से यह सिवईं मध्य प्रदेश और राजस्थान के लिए जाती है। संभल की सिवईं ईद पर मध्यप्रदेश और राजस्थान में खासतौर से पसंद की जाती है। अकेले उनके कारखाने से 70 टन माल एक सीजन में तैयार होता है।
अनुमान है कि सात सौ से आठ सौ टन मैदा की सिवईं एक वर्ष में संभल से तैयार होकर निकल जाती होगी। क्योंकि अपनी क्वालिटी और स्वाद के लिए अब संभल की सिवईं मशहूर हो चुकी है। इस सिवईं को जहां मुस्लिम समाज के लोग रमजान में खासतौर पर पसंद करते हैं वहीं हिंदू समाज में भी इसकी पहचान है। इसीलिए वर्ष भर थोड़ा-थोड़ा माल संभल से जाता रहता है। सिवईं बनाने का काम संभल में कई दशकों से हो रहा है।