संभल। पंचायत राज विभाग और शिक्षा विभाग कुछ भी कहे पर हकीकत में अभी जिले के कई स्कूलों में स्वच्छ शौचालय इस लायक नहीं हैं कि बच्चे उनका प्रयोग कर सकें। उन्हें खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है। कुछ बच्चे गांव में अपने घरों में शौच के लिए जाते हैं। इसमें उनका समय बर्बाद होता है और पढ़ाई भी प्रभावित होती है लेकिन इसके बाद भी सरकारी तंत्र सतर्क नहीं है। जिले में अब तक स्वच्छ शौचालय बनाने में ढाई अरब रुपये खर्च हो चुके हैं। जपनद ओडीएफ घोषित होने की ओर है लेकिन अभी सरकारी स्कूलों के सभी बच्चों को स्वच्छ शौचालय नसीब नहीं हो सका है। इस स्थिति में सुधार की मांग ग्रामीणों ने की है। जिला पंचायत राज अधिकारी जाहिद हुसैन का कहना है कि सभी स्कूलों में स्वच्छ शौचालय बनाए जाने हैं। अगर कोई स्कूल रह गए हैं तो उन्हें देखेंगे। उनका कहना है कि खुले में शौच मुक्त तो तभी होगा जब सभी के लिए शौचालय उपलब्ध हो और लोग उसका प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि जिन स्कूलों में शौचालयों की स्थिति सही नहीं है। उनके बारे में रिपोर्ट ली जाएगी।
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प्राइमरी विद्यालय शकरपुर, तारनपुर और ठाठी में शौचालय की हालत बद से बदतर हैं। शौचालय के आसपास के बाजरे के पूूले रखे हैं। शौचालय का उपयोग नहीं हो रहा है। बच्चों को इधर उधर जाना पड़ रहा है। कई स्कूलों के परिसरों में तो ग्रामीणों का ही कब्जा है। स्कूल परिसर में चारपाई रखी है और पशुओं का चारा तक रख लिया गया है।
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असमोली ब्लाक के अकबरपुर गहरा में स्वच्छ शौचालय बना है पर सीट टूट गई। शौचालय में पानी नहीं है। गंदगी भरी पड़ी है। बच्चे शौच के लिए खुले में जाने को मजबूर हैं। इसी स्कूल के मूत्रालयों में पाइप गायब हैं। स्कूल परिसर में स्वच्छता अभियान का कोई असर नहीं है।