चंदौसी/जुनावई। दो सगी बहनों के फंदे से झूल जाने के मामले में परिजन लगातार इसे आत्महत्या बता रहे हैं लेकिन मौका-ए-वारदात पर साक्ष्य कुछ अलग ही कहानी कह रहे हैं। जिससे पुलिस को भी दोनों युवतियों की हत्या किए जाने यानी ऑनर किलिंग की आशंका लग रही है।
कविता और सीमा के पिता का कहना है कि उसने अपनी दोनों बेटियों को इस लिए डांट दिया था कि उन्होंने माता-पिता की गैर मौजूदगी में पशुओं को चारा नहीं दिया। मां किरन भी स्वीकार करती है कि उसने दोनों बेटियों की संटी से पिटाई कर दी थी। लेकिन जब रविवार की सुबह पांच बजे दोनों को पेड़ पर लटका देखा तो किसी ग्रामीण को या पुलिस को नहीं बुलाया। दोनों को नीचे उतार लिया। यहां तक कि पेड़ पर बंधी रस्सी भी खोल ली।
इतना ही नहीं दोनों को मौके से उठाकर घर भी ले आए। किसी एक ग्रामीण ने भी दोनों को पेड़ से लटका हुआ नहीं देखा। पहले बताया कि रस्सी को जला दिया लेकिन फिर जो रस्सी पुलिस को दिखाई गई थी, वह काफी मोटा रस्सा था, लेकिन एसपी के पहुंचने पर जो रस्सी दिखाई गई वह काफी पतली थी, जिसे चारपाई बुनने में इस्तेमाल किया जाता है। फंदे पर लटकने वाले की जीभ बाहर निकल आती है लेकिन दोनों युवतियों के साथ ऐसा नहीं था।
जिस पेड़ पर लटकने की बात कही जा रही है, वह काफी मोटा है। उस पर चढ़ना आसान नहीं है। फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट ने बताया कि जिस डाल पर लटकने की बात कही जा रही है, उस डाल पर रस्सी बांधे जाने, खिंचने के निशान नहीं है, क्योंकि पूरी डाल पर पक्षियों की वीट जमी हुई है।
डाल की ऊंचाई साढ़े सात फीट और मोटाई 140 सेमी है। पुलिस जब घर पहुंची तो एक कमरे से कुल्हाड़ी, रस्सी आदि मिले तो घेर से महिलाओं जैसे कुछ लंबे बाल, बालों में लगाने का हेयर पिन आदि मिले हैं। जिसे देखकर यह आशंका जताई जा रही है कि दोनों युवतियों की रात को किसी समय घेर में ही हत्या कर दी गई।
उनकी मौत के बाद उनके आत्महत्या करने की कहानी लोगों को शोर मचाकर सुना दी गई। लेकिन अभी इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी है। आत्महत्या की बताई जा रही वजह पर भी लोग भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। सिर्फ पशुओं को चारा नहीं डालने पर डांटने भर से दो बहनें एक साथ आत्मघाती कदम उठा सकती हैं।
घटना के पीछे कोई न कोई बड़ी वजह हो सकती है। लेकिन इन सभी सवालों से पर्दा तो तभी उठेगा, जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद बारीकी से मामले की जांच होगी। संदिग्धता को देखते हुए कोतवाली प्रभारी अता मोहम्मद खां ने दोनों शवों का पोस्टमार्टम वीडियोग्राफी और डाक्टरों के पैनल से कराने को लिखा है।
आनन फानन में दोनों का दाह संस्कार करने की थी तैयारी
जुनावई/गुन्नौर। धूमना दीपपुर गांव में रामवीर सिंह यादव की दो बेटियों की संदिग्धावस्था में मौत के बाद परिजन आनन-फानन में उनका अंतिम संस्कार करने की तैयारी में थे। लेकिन इससे पहले किसी ग्रामीण ने पुलिस को सूचना दे दी। पुलिस ने शवों को अपने कब्जे में ले लिया।
रामवीर सिंह यादव ने सुबह पांच बजे शोर मचाया कि उसकी दोनों बेटियों ने आत्महत्या कर ली है। दोनों बेटियों के शव उसके घर में ही रखे थे। बिना पुलिस को बताए ही रामवीर लगातार उनकी अर्थी बनाने पर जोर दे रहा था। यहां तक कि खुद ही अर्थी बनाने में जुट गया। लेकिन इसी दौरान किसी ग्रामीण ने कोतवाली प्रभारी अता मोहम्मद को फोन पर सूचना दे दी। पुलिस पहुंच गई तो अंतिम संस्कार नहीं हो पाया, लेकिन पुलिस पहुंचने में थोड़ी सी भी देर करती तो दोनों शवों का अंतिम संस्कार हो जाता।
दोनों बहनों की तीन माह बाद होनी थी शादी
पांच भाई बहन थी मृतक बहनें
जुनावई/चंदौसी। धूमना दीपपुर निवासी रामवीर सिंह यादव की पांच संतानें थी। सबसे बड़ी बेटी अनीता व सुनीता की शादी हो चुकी है। उनसे छोटा बेटा सुरेंद्र सिंह बाहर रहकर पढ़ाई भी करता है और काम भी करता है। इसके बाद कविता और सीमा थी। जिन दोनों की उम्र भी शादी योग्य थी। बताते हैं कि कुछ दिन पहले ही रामवीर सिंह ने बड़ी तेजी के साथ दोनों के लिए लड़के तलाशने शुरू कर दिए थे। दोनों की शादी ईसापुर बरौरा गांव में युवकों से तय कर दी थी। दोनों की शादी अप्रैल व मई में करने की योजना थी। हालांकि अभी तारीखें तय नहीं हो सकी थी। परिवार आर्थिक दृष्टि से कमजोर है। दोनों बहनों को कक्षा पांच तक स्कूल की प्राइमरी पाठशाला में पढ़ाया गया था लेकिन इसके बाद पिता ने दोनों युवतियों को नहीं बढ़ाया। दोनों ही खेती किसानी में हाथ बंटाती थीं।
दोनों बहनों के बीच बेहद प्यार था
चंदौसी/जुनावई। धूमना दीपपुर गांव के लोग बताते हैं कि कविता और सीमा दोनों में बेहद प्यार था। वह हमेशा साथ ही रहती थीं। जहां जाती थीं, साथ ही जाती थीं, वह दोनों आगे पढ़ना चाहती थीं लेकिन परिजनों ने उन्हें पढ़ने के लिए दूसरे गांव भेजने से मना कर दिया था।
कविता और सीमा की उम्र में सिर्फ एक साल का अंतर था, बचपन में दोनों स्कूल भी साथ जाती थीं तो एक ही कक्षा में पढ़ती थीं। वह आगे भी पढ़ना चाहती थी लेकिन गांव में सिर्फ पांचवीं तक ही स्कूल था। परिजनों ने दूसरे गांव भेजने से मना कर दिया। इसके बाद दोनों खेत-खलिहान में हाथ बंटाने लगी। दोनों ने युवावस्था में कदम रख दिया लेकिन दोनों हमेशा साथ रहती थीं। दोनों एक-दूसरे की हमराज भी थीं।
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-कुछ संदिग्ध तो लग रहा है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए सभी बिंदुओं पर जांच की जाएगी।
-गमलेश्वर विल्टोरिया, पुलिस क्षेत्राधिकारी गुन्नौर।