संभल। आजादी के बहत्तर साल बाद भी संभल लोकसभा के कुछ गांव ऐसे हैं, जहां संपर्क मार्ग तक दुरुस्त नहीं है। आलम यह है कि यहां यदि किसी युवती की बारात आती है तो बारात को दूसरे गांव में ही अपने वाहनों को रोकना पड़ता है। दूल्हे की बग्घी दुल्हन के घर तक नहीं पहुंचती है। ग्रामीण बाइक या साइकिल पर बैठाकर दूल्हे को अपने गांव ले जाते हैं। वहीं बारातियों को भी पैदल गांव तक का रास्ता तय करना होता है।
किसी के घर मेहमान आ जाएं तो भी वाहन को दूसरे गांव में छोड़कर पैदल गांव पहुंचना पड़ता है। समस्या तो यहां तक है कि इन दिक्कतों के कारण लोग अपनी बेटियों की शादी इस गांव के युवकों से करने में कतराते हैं।
शनिवार को तहसील के गांव झद्दा के ग्रामीणों से हमारा सांसद कैसा हो मुद्दे पर बातचीत की। कृपाल सिंह ने कहा कि गांव का मुख्य मार्ग तो आप देख ही चुके हैं। बाइक के अलावा उस मार्ग से कोई और वाहन नहीं आ सकता। बारात आती है तो दूल्हा से लेकर बारातियों तक की गाड़ी को गांव बसला में खड़ी करनी पड़ती है। इसके बाद बाइक से दूल्हा को गांव तक लाया जाता है और बाराती पैदल गांव पहुंचते हैं। यह दूरी करीब दो किलोमीटर की है। इस बदहाल मार्ग के कारण गांव के कई युवाओं के रिश्ते टूट गए।
विक्रम सिंह जाटव ने कहा कि इस गांव का मुख्य मार्ग आजादी के बाद भी किसी जनप्रतिनिधि की नजर में नहीं आया। स्थानीय नेताओं से लेकर प्रशासन तक कई बार गांव के लोग पहुंचे लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। करन सिंह जाटव कहते हैं यह कच्चा और जर्जर मार्ग गांव झद्दा, सौंडा, मढैया और भटौला के लिए जाता है। इन सभी गांव में करीब दस हजार से ज्यादा लोग रहते हैं।
चुनावी दौर में जनप्रतिनिधि वोट मांगने के लिए आते हैं लेकिन बाद में कोई नहीं आता। निहाल सिंह जाटव कहते हैं कि गांव का मुख्य मार्ग कच्चा होने के साथ ही तंग भी है। बरसात में पैदल निकलना मुश्किल होता है। धर्म और जाति पर सारे नेता राजनीति करते हैं लेकिन मूलभूत सुविधाओं के नाम पर आश्वासन दिया जाता है। इस बार का चुनाव बहुत सोचकर लड़ाया जाएगा।
मतदान भी उसके लिए होगा जो गांव के विकास के लिए सच में कुछ करे। इस दौरान उमेश सिंह, कपिल, विवेक, दीपक, रतिराम, कल्लू सिंह, हेमंत सिंह, रिंकू, कीर्ति सरन, जगदीश, सोनू आदि ने भी जनप्रतिनिधियों को वादा खिलाफी करने वाला बताया और इस बार का मतदान सोच समझकर करने की बात कही है।