देवबंद। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग पीसीएस-2023 की परीक्षा में यूपी टॉपर सिद्धार्थ गुप्ता पढ़ाई के लिए कस्बे से निकलकर बड़े शहर में पहुंचे। जहां उन्होंने खुद को परिस्थितियों के अनुकूल ढाला और सफलता के उस मुकाम को छुआ, जो उनका और उनके पिता का सपना था। कठियानाइयों को कभी हावी नहीं होने दिया। आगामी बोर्ड और सीबीएसई परीक्षा को लेकर उन्होंने युवाओं को सलाह दी की परीक्षा में बेस्ट दें, लेकिन इसे इतना गंभीरता से न लें कि यह जिंदगी से बड़ा हो जाए। पेश है उनसे बातचीत के कुछ अंश।
सवाल : किन परिस्थितियों में आपने पढ़ाई पूरी की और आगे की पढ़ाई के लिए क्या मुश्किलें सामने आईं।
जवाब : नगर के दून वैली पब्लिक स्कूल से इंटर करने के बाद मैं आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली चला गया। बड़े शहरों का कल्चर यहां से अलग था। मैं छोटे कस्बे से गया तो खुद को उस माहौल में रमने के लिए थोड़ा वक्त लगा, लेकिन उन्होंने उन परिस्थितियों के अनुकूल खुद को ढाल लिया। क्योंकि जिस माहौल से मैं निकल कर गया उसमें आस पड़ोस के लोग भी हालचाल जान लेते हैं। जब मैंने तैयारी शुरू की तो वहां भी मैंने बहुत से असफल लोगों को देखा है। पांच साल मैंने यह पद प्राप्त किया है। मेरे लिए यह मुश्किल भरा था।
सवाल : नायब तहसीलदार बनने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए समय कैसे निकाला और यह कितना कठिन रहा।
जवाब : नायब तहसीलदार की ज्वाइनिंग आते हैं मुझे ट्रेनिंग पर भेज दिया गया था। वहां पर भरपूर समय मुझे मिल जाता था। जिसमें मैंने पीसीएस के लिए तैयारी की। जब मेरी तैनाती हुई उसमें जितना भी समय मुझे मिलता उसका मैं बेहतर उपयोग करता था। समय का सही उपयोग करना बेहद जरूरी होता है।
सवाल : इस मुकाम को छूने की प्रेरणा कहां से मिली।
जवाब : बचपन से ही मेरा सपना था कि मुझे सिविल सेवा में जाना है। जिसके लिए मैंने मेहनत से पढ़ाई की। दिल्ली जाने पर मेरे जितने भी साथी थे, उन्होंने मुझे सहयोग और हौसला दिया।
सवाल : पूरे प्रदेश में आपका और आपकी वजह से देवबंद का नाम रोशन हो रहा है। इसके लिए क्या कहेंगे।
जवाब : मैं देश और प्रदेश में अपने शहर का नाम रोशन करने का कारण बना इसके लिए खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं।
सवाल : यूपी बोर्ड और सीबीएसई की परीक्षा आने वाली हैं। ऐसे में युवाओं के लिए आपका क्या संदेश है।
जवाब: सीबीएसई और यूपी बोर्ड के परीक्षार्थियों को मैं यही कहना चाहूंगा कि आप परीक्षा में बेस्ट दें, लेकिन इन परीक्षा को इतना गंभीरता से न लें कि यह जिंदगी से बड़े हो जाएं। तनाव लेने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। अच्छे से पढ़ें और अच्छे नंबर लाएं और अपने माता-पिता का नाम रोशन करें।