सहारनपुर। शिवरात्रि पर विधि-विधान से भगवान शंकर और मां पार्वती की पूजा करने से श्रद्धालु की सभी मनोकामना पूरी होंगी। शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखकर ही भगवान आशुतोष का अभिषेक किया जाए। इनमें पंचामृत अभिषेक विशेष महत्व रखता है।
राधा विहार स्थित श्री औघड़दानी नर्मदेश्वर महादेव मंदिर के अधिष्ठाता स्वामी कालेंद्रानंद महाराज और ब्रह्मपुरी कॉलोनी स्थित श्री बगलामुखी मंदिर के अधिष्ठाता पंडित रोहित वशिष्ठ ने शिवरात्रि पर की जाने वाली पूजा-अर्चना की विधि बताई। उन्होंने बताया कि सर्वप्रथम शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव को हाथ जोड़कर प्रणाम करें। आसन बिछाकर भोलेनाथ की ओर मुख कर बैठ जाए। पूजा की सामग्री वस्त्र, जनेऊ, गंगाजल, पुष्प चंदन, साबुत चावल, धूप, दीपक, बेलपत्र, धतूरे का फल और पुष्प, दूर्वा तुलसी पत्ते, फल व मिठाई अपने पास रख लें। पंचामृत में दूध, दही, देसी घी, शहद और शक्कर का मिश्रण करें।
इन पांच वस्तु में यदि किसी एक वस्तु का अभाव हो तो गंगाजल का इस्तेमाल करें। मन में भगवान शिव का ध्यान करते हुए पूजा शुरू करें। सर्वप्रथम जलाभिषेक कर शिवलिंग पर चंदन का तिलक लगाएं। इसके पश्चात पुष्प अर्पित करें और पंचामृत से स्नान कराएं। धूप बत्ती और दीपक से भगवान की आरती उतारें। शिव मंदिर की आधी परिक्रमा करें। एकांत स्थान में बैठकर ओम नमः शिवाय मंत्र का 108 बार जप करें। इससे मनोकामना पूर्ण होगी।