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दिल का रखें ख्याल, सरकारी अस्पतालों में नहीं है इलाज

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दिल का रखें ख्याल, सरकारी अस्पतालों में नहीं है इलाज
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सहारनपुर। जिले में दिल के मरीजों के इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है। हालांकि यहां जिला अस्पताल और राजकीय मेडिकल कॉलेज दोनों हैं, लेकिन हृदय रोगियों को इलाज के लिए निजी चिकित्सकों के पास जाना पड़ता है या फिर देहरादून, दिल्ली, चंडीगढ़ और बराड़ा जाते हैं। एसबीडी जिला अस्पताल में कॉर्डियोलॉजिस्ट का पद दस वर्ष से अधिक समय से खाली है। वर्तमान में फिजीशियन डॉ. अनिल वोहरा ही दिल के मरीजों का इलाज कर रहे हैं। उधर, शेखुल हिंद महमूद हसन मेडिकल कॉलेज पिलखनी पीजीआई बन चुका है, मगर वहां कॉर्डियोलॉजिस्ट और कैथ लैब भी नहीं है। ।
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- सर्दियों में बढ़ जाते हैं दिल के मरीज
जिला अस्पताल में सर्दियों के दिनों में फिजीशियन की ओपीडी और इमरजेंसी वार्ड में आने वाले मरीजों में ज्यादातर दिल के मरीज होते हैं। फिजीशियन डॉ. कुनाल जैन ने सर्दियों में दिल के मरीजों की संख्या 50 से 60 फीसदी बताई है। बता दें कि जिला अस्पताल में फिजीशियन की ओपीडी में कोरोना से पहले सामान्य दिनों में 250 से 300 और बीमारियों के दिनों में 800 तक मरीज पहुंचते थे। मौजूदा समय में 150 से 200 मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं। हालांकि इनमें हृदय रोगी कम हैं।
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राजकीय मेडिकल कॉलेज में कॉर्डियोलॉजिस्ट का पद खाली है, साथ ही कैथ लैब भी नहीं है। ऐसे में दिल के मरीजों को प्राथमिक उपचार तो फिजीशियन द्वारा दे दिया जाता है, मगर गंभीर मरीजों को रेफर करना पड़ता है। - डॉ. संजीव कुमार, सीएमएस, राजकीय मेडिकल कॉलेज।
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- एसबीडी जिला अस्पताल में कॉर्डियोलॉजिस्ट नहीं हैं। फिजीशियन ही हृदय रोगियों को अपने स्तर से इलाज देते हैं। जिला अस्पताल में चिकित्सकों के 50 फीसदी से अधिक पद खाली हैं, जिनकी वजह से समस्या रहती है।
- डॉ. एसएस लाल, प्रमुख अधीक्षक, एसबीडी जिला अस्पताल।
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