उधार के कर्मचारियों से काम, विवि की व्यवस्था धड़ाम
सहारनपुर। मां शाकंभरी विश्वविद्यालय को लेकर सरकार जितनी गंभीरता दिखा रही है, व्यवस्था उतनी ही चौपट होती जा रही है। विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्थाएं संचालित करने के लिए अभी तक कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं हुई है। ऐसे में कुलपति और कुलसचिव ने किसी तरह दूसरे महाविद्यालयों से तीन कर्मचारी लिए हुए हैं। उनके ही सहारे विश्वविद्यालय के काम चल रहे हैं। यही वजह है कि तमाम व्यवस्थाएं पटरी पर नहीं आ पा रही हैं।
दो दिसंबर 2021 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मां शाकंभरी विश्वविद्यालय का शिलान्यास किया था। इसके साथ ही अभी तक चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से संबद्ध चले आ रहे सहारनपुर मंडल के तीनों जनपदों के 233 महाविद्यालयों को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से हटाकर मां शाकंभरी विश्वविद्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। सत्र 2022-23 से विश्वविद्यालय ने उक्त सभी 233 महाविद्यालयों की परीक्षाओं, दाखिलों आदि की व्यवस्थाएं अपने हाथ में ले ली है। कुलपति के रूप में प्रोफेसर एचएस सिंह और कुलसचिव के रूप में वीरेंद्र कुमार मौर्य की तैनाती की गई, लेकिन अभी तक प्रशासनिक कार्यों को संचालित करने के लिए कर्मचारियों की तैनाती नहीं की गई है।
ऐसे में व्यवस्थाओं को संचालित करने के लिए कुलपति ने महाविद्यालयों से तीन कर्मचारी लिए हैं, जो पुवांरका में बैठकर काम काज निपटाते हैं। नतीजा यह है कि पर्याप्त और स्थायी कर्मचारी नहीं होने की वजह से तमाम व्यवस्थाएं पटरी पर नहीं आ पा रही हैं। पहले ऑनलाइन परीक्षा फॉर्म भरने की प्रक्त्रिस्या शुरू की गई, लेकिन विद्यार्थियों की लेटलतीफी के चलते तिथि बढ़ानी पड़ी। इसके बाद स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्त्रस्मों में पहली बार दाखिले की प्रक्त्रिस्या शुरू की गई। महाविद्यालयों से सीटों का डाटा विश्वविद्यालय को उपलब्ध नहीं कराने की वजह से विश्वविद्यालय मेरिट तैयार नहीं कर पा रहा है। 15 अगस्त अंतिम तिथि थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 25 अगस्त किया गया है। इसी प्रकार सेमेस्टर परीक्षाएं 23 अगस्त से होनी थी, लेकिन उनकी तिथि बढ़ाकर 29 अगस्त कर दी गई है। विश्वविद्यालय अधिकारियों का कहना है कि तिथि बढ़ाने की वजह महाविद्यालयों द्वारा सहयोग नहीं करना और विद्यार्थियों द्वारा समय से आवेदन नहीं करना है, जबकि हकीकत यह है कि विश्वविद्यालय के पास कर्मचारी नहीं होने की वजह से भी कई कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
निजी महाविद्यालयों का भी लिया जा रहा सहयोग
विश्वविद्यालय प्रशासन व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए महाविद्यालयों के प्रोफेसर्स से सहयोग ले रहा है। राजकीय और एडेड महाविद्यालयों के अपने कार्य हैं, जिनके लिए उनके पास भी स्वीकृत पदों की तुलना में शत प्रतिशत कर्मचारी नहीं हैं। ऐसे में वह विश्वविद्यालय को अपने कर्मचारी देने से बच रहे हैं, क्योंकि इससे उनके कार्य प्रभावित होने का खतरा है। ऐसे में विश्वविद्यालय निजी महाविद्यालयों के कर्मचारियों से भी सहयोग ले रहा है।
विश्वविद्यालय में अभी तक स्थायी कर्मचारियों की तैनाती नहीं हुई है। हमने महाविद्यालयों से तीन कर्मचारियों को विश्वविद्यालय से अटैच किया हुआ है, जिससे कार्य प्रभावित न हो। रही बात परीक्षा और दाखिले के लिए आवेदन की तिथियां बढ़ाने की तो विद्यार्थी काफी लापरवाह हैं, जो अंतिम तिथि आने पर ही सक्त्रिस्य होते हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में छात्र आवेदन से छूट रहे हैं। उन्हीं को देखते हुए तिथियां बढ़ाई गई हैं।
वीरेंद्र कुमार मौर्य, कुलसचिव, मां शाकंभरी विश्वविद्यालय