सहारनपुर। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाए गए 27 फीसदी टैरिफ (आयात शुल्क) से सहारनपुर का वुड कार्विंग निर्यात लड़खड़ाने लगा है। इससे पहले से मंदी का सामना कर रहे वुड कार्विंग निर्यातकों में बेचैनी बढ़ गई है। निर्यातकों को उम्मीद है कि सरकार इस उद्योग को बचाने के लिए कोई सकारात्मक कदम उठाएगी।
सहारनपुर के वुड कार्विंग उत्पादों की विश्व भर में काफी मांग है। यहां के काष्ठ हस्तशिल्प उत्पादों का वार्षिक कारोबार लगभग 1300 से 1600 करोड़ रुपये का है। इसमें सालाना 1100 से 1200 करोड़ रुपये का वार्षिक निर्यात भी शामिल है। पिछले करीब तीन वर्षों से रूस एवं यूक्रेन युद्ध और इस्राइल एवं हमास की जंग के चलते वुड कार्विंग उद्योग मंदी से जूझ रहा है। अब अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए टैरिफ की घोषणा ने वुड कार्विंग उत्पादों के निर्यात को जोर का झटका दिया है। इससे काष्ठ हस्तशिल्प उद्योग की मुसीबत और बढ़ गई है। दरअसल, अमेरिका के कई आयातकों ने पहले से लगभग 250 से 300 करोड़ रुपये के ऑर्डर होल्ड पर कर रखे हुए हैं। जनपद के कुल काष्ठ हस्तशिल्प उत्पादों के निर्यात में करीब 50 प्रतिशत अमेरिका की हिस्सेदारी है।
बोले निर्यातक -
डाेनाल्ड ट्रंप की भारतीय उत्पादों पर टैरिफ लगाने की घोषणा से वुड कार्विंंग उत्पादों के निर्यात को तगड़ा झटका लगा है। 16 से 19 अप्रैल तक ग्रेटर नोएड़ा में लगने वाले अंतरराष्ट्रीय मेले में हमारे दो ग्राहकों ने आना कैंसिल कर दिया है। निर्यात ऑर्डर होल्ड पर हैं। यदि सरकार ने इस उद्योग को बचाने के लिए कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाए तो यह बर्बाद हो जाएगा। - परविन्दर सिंह, उद्यमी एवं निर्यातक।
टैरिफ लगाने की घोषणा होने के बाद अमेरिकी ग्राहक निर्यात ऑर्डर होल्ड पर या कैंसिल कर रहे हैं। इससे हमारे करीब 15 करोड़ रुपये के ऑर्डर होल्ड हुए हैं। अमेरिकी ग्राहक मेल भेजकर कह रहे है कि टैरिफ लगने से बढ़ने वाली धनराशि के आधे हिस्से को निर्यातक वहन करनी होगी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कडी प्रतिस्पर्धा के चलते इस शर्त को पूरा करना संभव नहीं होगा। आरिफ शेख, उद्यमी एवं निर्यातक।