सहारनपुर में शहीदे-आजम सरदार भगत सिंह की शहादत दिवस से शुरू होने वाली साझी शहादत, साझी विरासत श्रृंखला का साक्षी बनने को पूरा शहर तैयार है।
शहादत दिवस 23 मार्च को भगत सिंह चौक से फुलवारी आश्रम तक की सद्भावना यात्रा में सहभागिता के लिए शहर के विभिन्न सामाजिक, व्यापारिक संगठनों ने सहमति जताई है। सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में सद्भावना यात्रा को ऐतिहासिक बनाने का निर्णय लिया गया।
सबने एक सुर में कहा कि गंगा जमुनी तहजीब के शहर सहारनपुर की यह यात्रा मिसाल बनेगी। आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण योगदान निभाने वाला हमारा शहर अब साझी शहादत साझी विरासत के जरिए क्रांतिकारियों की गाथा नई पीढ़ी तक पहुंचाएगा।
संस्कार निधि, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संगठन, ज्ञान कलश स्कूल, हिन्दू कुमार सभा, विकास प्राधिकरण, जिला प्रशासन, नगर निगम और अमर उजाला के साझी शहादत साझी विरासत कार्यक्रम श्रृंखला की पहली कड़ी सद्भावना यात्रा में जन सहभागिता के लिए रेलवे रोड स्थित सभागार में बैठक की गई।
विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष वेद प्रकाश सिंह ने कहा कि यह बेहद गर्व की बात है कि शहीदे आजम भगत सिंह का सहारनपुर से गहरा जुड़ाव रहा है। ऐसे में हम शहीदे आजम की शहादत दिवस पर सद्भावना यात्रा के जरिए नई पीढ़ी तक उनकी गाथा पहुंचाएंगे। यह कार्य क्रम किसी एक व्यक्ति या संस्था का नहीं बल्कि पूरे शहर और समाज का है।
नगरायुक्त डा. नीरज शुक्ला ने कहा कि क्रांतिकारियों की कर्मभूमि फुलवारी आश्रम को विकसित कर हम नई पीढ़ी को इतिहास से रुबरु कराएंगे। सद्भावना यात्रा के बाद प्रदर्शनी में हर घर का बच्चा आए और अपने इतिहास की समझे। देश की आजादी के लिए जान न्यौछावर करने वाले शहीदे आजम को श्रद्धांजलि के लिए उन्होंने सभी संगठनों से पूरी ऊर्जा से भागीदारी की अपील की।
पूर्व मंत्री संजय गर्ग ने कहा कि सहारनपुर की माटी पर हम सबको फख्र करना चाहिए कि शहीदे आजम की यादें यहां से जुड़ी हैं। उन्होंने बताया कि सदभावना यात्रा का रामलीला कमेटी, मदरसा मजाहिर उलूम वक्फ, मदरसा मजाहिर उलूम जदीद, हिन्दू कन्या इंटर कालेज सहित अन्य संगठन स्वागत करेंगे। इसके अलावा सामाजिक, व्यापारिक संगठनों के साथ ही स्कूली बच्चे और मदरसों के तालिबीम हिस्सा लेंगे। जयनाथ शर्मा ने बताया कि 23 मार्च के बाद 13 अप्रैल को फुलवारी आश्रम में दंगल का आयोजन किया जाएगा।
इसमें शहीदे आजम के भतीजे किरणजीत सिंधू, पूर्व विधायक वीरेन्द्र ठाकुर, सुरेन्द्र कपिल, मौलाना असद, मौलाना रियाज, फादर जान वैस्ले, तिलकराज भाटिया, राधा मिश्रा, माई दयाल, दलजीत कोचर, सरदार अनवर, जयवीर राणा ने भी संबोधित किया।
कूलभूषण जैन अध्यक्ष रहे और वीरेन्द्र आजम ने संचालन किया। इसमें नीरपाल सिंह, हरीश पंवार, सुरेन्द्र चौहान, ब्रित चावला, अश्वनी भारद्वाज, राजीव सिंह, नौशाद खान, शमशेर अली, मुस्तकीम राणा, आलम चौधरी, रविन्द्र वर्मा, आजम शाह, संदीप जैन, मुकेश, अनिल रसवंत, दिनेश शर्मा, कमलराज कमल, दलजीत कोचर, सतनाम, धीरज बत्रा, मंजू शर्मा, प्रमोद वत्स, नरेन्द्र शर्मा, राहुल शर्मा, हरीहर पांडे, मनीष कच्छल, तिलक राज भाटिया, गुलशन कपूर, अन्नू बिरला, अनूप कल्याण आदि रहे।