सहारनपुर। सर्दी के साथ ही विंटर डायरिया ने भी दस्तक दे दी है। एसबीडी जिला अस्पताल की ओपीडी में विंटर डायरिया से ग्रसित बच्चे पहुंचने लगे हैं। बीते करीब एक सप्ताह से प्रतिदिन विंटर डायरिया के मामले सामने आ रहे हैं।
एसबीडी जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. बिरेंद्र भट्ट ने बताया कि करीब एक माह से ज्यादातर बच्चों में खांसी और जुकाम के साथ ही वायरल फीवर की भी शिकायत देखने को मिल रही है। वायरल फीवर में अब कुछ कमी है। मगर अब नई समस्या विंटर डायरिया की है। प्रतिदिन आठ से दस बच्चे उल्टी और दस्त से जुड़े पहुंच रहे हैं। उनका कहना है कि यह विंटर डायरिया की दस्तक है। ऐसे में अभिभावकों को सचेत हो जाना चाहिए। विंटर डायरिया लापरवाही के कारण होता है और होने के बाद लापरवाही बच्चे को और नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसे में बच्चों के खानपान के साथ ही उनको सर्दी से बचाने के लिए जरूरी कपड़े पहनाए जाए।
विंटर डायरिया
डॉ. बिरेंद्र भट्ट ने बताया कि डायरिया होने के प्रमुख करण सफाई की कमी, बच्चों में कमजोरी व सही समय पर सही इलाज नहीं मिलना है। डायरिया 60-80 प्रतिशत मौकों पर वायरस जनित ही होता है। विंटर डायरिया सर्दी के मौसम में रोटावायरस इंफेक्शन से होता है।
विंटर डायरिया के लक्षण
- बच्चे को बार-बार दस्त आना।
- उल्टी के साथ ही उबकाई भी आना।
- बार-बार दस्त और उल्टी आने से पेशाब का कम आना।
यह सावधानियां बरतें
बच्चों को विंटर डायरिया से बचाने के लिए उन्हें सर्दी की शुरुआत में सुबह-शाम गर्म कपड़े पहनाएं। उल्टी दस्त होने की वजह से बच्चों के शरीर में पानी की कमी हो जाती है। ऐसे में उन्हें अधिकतम ओआरएस का घोल पिलाते रहे। नवजात बच्चों की माताओं को चाहिए कि वह ऐसी चीजों का सेवन ना करें, जिससे बच्चे का पेट खराब हो। साथ ही कोई भी परेशानी होने पर तुरंत नजदीकी योग्य चिकित्सक से परामर्श लें।
चूंकि सर्दी शुरू हो चुकी है। अब बच्चों में विंटर डायरिया के साथ ही खांसी और जुकाम तथा अन्य तरह की परेशानी भी आएंगी, जो सामान्य बात है। मगर कई बार माता-पिता की लापरवाही बच्चों को अधिक परेशान कर देती है। ऐसे में जरूरी है कि कोई भी परेेेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें। - डॉ. एके चौधरी, वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ, एसबीडी जिला अस्पताल।