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दौड़ जीतिए इनाम लीजिए या नशा छोड़िए

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सहारनपुर। धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, इसे सिद्ध किया है 80 वर्षीय धावक किशन सिंह चौहान ने। उन्होंने खेल के माध्यम से सैकड़ों लोगों की नशे की लत छुड़ाई। इन दिनों वह कानपुर में रह रहे हैं, लेकिन उनके पुत्र डीएस चौहान सहारनपुर के अहमदबाग में रहते हैं।
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वह बताते हैं कि केएस (किशन सिंह) चौहान एशिया में तीन स्वर्ण पदक विजेता रहे हैं। उन्होंने 1986 में नशे के खिलाफ यह अनोखी मुहिम शुरू की थी। नशा करने वाले 40 वर्ष से अधिक आयु वालों को 20 किलोमीटर दौड़ की चुनौती दी थी। तब 26 जनवरी 1986 को सहारनपुर में दिल्ली रोड पर सिविल कोर्ट चौराहे से चुन्हेटी रेलवे फाटक तक 10 नशा करने वालों ने दौड़ में हिस्सा लिया था, लेकिन वह सभी हार गए थे। केएस चौहान की यह अनोखी चुनौती गत 35 वर्षों से बरकरार है और अब वह चुनौती रखते हैं कि कोई भी 50 वर्ष से अधिक आयु का नशा करने वाला व्यक्ति उनसे 20 किलोमीटर दौड़ जीत जाए तो 10 हजार रुपये इनाम मिलेगा।
-- रोजाना 10 किमी रेस वॉक करते हैं
किशन सिंह चौहान प्रतिदिन 10 किलोमीटर रेस वॉक करते हैं और अपने खेल माध्यम से नशे की लत छुड़ाने और शाकाहारी बनाने के प्रसार में लगे है। रुड़की दूरसंचार विभाग से 1998 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर वह समाजसेवा से जुड़े। 70 वर्ष की आयु में कानपुर यूनिवर्सिटी से प्राइवेट विद्यार्थी के तौर पर इतिहास, दर्शन शास्त्र और हिंदी के बाद 80 वर्ष की आयु में समाजशास्त्र विषय से परास्नातक की डिग्री हासिल की। नौ पुस्तकें भी लिखकर प्रकाशित कर चुके हैं।
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