शिक्षण संस्थाओं में कक्षा एक से आठवीं तक के बच्चों को सरकार की ओर से मुफ्त दिए जाने वाले स्कूल बैग की गुणवत्ता अब प्रयोगशालाओं में परखी जाएगी। बैग का वितरण विधानसभा चुनाव के बाद ही हो सकेगा। गुणवत्ता परखने के लिए संस्थाओं का निर्धारण किया जा रहा है। जो रैंडमली जांच कर गुणवत्ता को परखेंगी।
सरकार परिषदीय, सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों, सहायता प्राप्त मदरसों, राजकीय इंटर कॉलेजों और सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को स्कूल बैग मुफ्त में मुहैया कराती है। वर्षों से चली आ रही यह योजना कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार की वजह से पूरी तरह सफल नहीं हो पा रही है।
अक्सर देखा गया है कि बच्चों को खराब गुणवत्ता के स्कूल बैग थमा दिए जाते हैं। इसकी वजह शिक्षकों से लेकर अधिकारियों तक की कमीशनखोरी है। शासन भी इस बात से अच्छी तरह वाकिफ है। यही वजह है कि शासन ने नए सत्र से बच्चों को दिए जाने वाले स्कूल बैग की गुणवत्ता को परखने के लिए संस्थाओं का गठन करने का निर्णय लिया है।
रैंडमली जांच में उठे सवाल
सहारनपुर। कमीशनखोरों ने स्कूल बैग की जांच के बावजूद अपना कमीशन जारी रखने का तरीका खोज लिया है। सूत्रों की मानें तो रैंडमली जांच के लिए कोई भी शिक्षक अच्छी गुणवत्ता वाला ही बैग देगा। जांच टीमों को चाहिए कि वह स्कूलों में जाकर बैग की जांच करें।
यूनिफार्म की गुणवत्ता पर भी उठते रहे सवाल
सरकारी स्कूलों में कक्षा आठ तक के बच्चों को सरकार की ओर से नि:शुल्क यूनिफार्म देने का प्रावधान है। ज्यादातर स्कूलों में यूनिफार्म की गुणवत्ता अच्छी नहीं रहती। अभिभावकों द्वारा अक्सर यूनिफार्म गुणवत्ता पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। मगर आज तक किसी भी शिक्षक या संबंधित अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।