विधवा की नाबालिग बेटी को बहलाकर अलीगढ़ ले जाने के बाद दुष्कर्म करने के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश ओमप्रकाश त्रिपाठी ने अभियुक्त को सात साल की कैद की सजा सुनाई है। दुष्कर्म के अलावा अन्य धाराओं में भी सजा और जुर्माना किया गया है।
अलीगढ़ जनपद के अतरोली पीपली का रहने वाला कृष्णा शहर के गलीरा रोड पर रहता था। वह टेंपो चलाता था। वर्ष 2012 के सितंबर में घर में सफाई करने वाली एक बेवा ने कोर्ट रोड पर अपनी 12 वर्षीय बेटी को कृष्णा के टेंपो में घंटाघर जाने के लिए बिठाया था लेकिन वह लड़की को कहीं और लेकर चला गया।
बाद में इस मामले में थाना सदर में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। बाद में सदर पुलिस ने लड़की को अलीगढ़ से बरामद किया।
पुलिस की विवेचना में सामने आया कि नाबालिग को अगवा करने के बाद उसके साथ दुष्कर्म किया गया।
इस मामले में पुलिस ने कृष्णा के अलावा दानिश और हरिओम को आरोपी बनाते हुए आईपीसी की धारा 363, 366, 368 और 376 में चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी।
सहायक शासकीय अधिवक्ता विक्रमजीत सिंह यादव ने बताया कि अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान उपलब्ध साक्ष्य एवं गवाहों के आधार पर कृष्णा को धारा 363 में तीन वर्ष की सजा, 1000 रुपये का अर्थदंड और 366 में तीन वर्ष की सजा और एक हजार रुपये का अर्थदंड दिया गया।
इसके अलावा धारा 368 में तीन वर्ष और 1000 रुपये अर्थदंड और धारा 376 में सात वर्ष की सजा एवं 2000 रुपये का अर्थदंड दिया गया। इस मामले में दानिश और हरिओम को बरी कर दिया गया है।