बड़गांव। पंचायत चुनाव को लेकर सरगर्मियां शुरू हो गई हैं। चौधर के लिए मैदान में उतरने वाले दावेदारों ने बिसात बिछानी शुरू कर दी है। चौधर के चस्के के लिए पिछले चुनाव में कई रोचक मामले भी सामने आए। ऐसा ही एक गांव है सांवतखेड़ी। यहां के रहने वाले जंगपाल सिंह दो बार खुद प्रधान रह चुके हैं, एक बार उनकी पत्नी और पिछली योजना में सीट एससी आरक्षित हुई तो भरोसेमंद बंटाईदार पप्पू को मैदान में उतारकर प्रधान बनवा दिया।
रामपुर मनिहारान तहसील के गांव सांवतखेड़ी में भी चुनावी सुगबुगाहट तेज हो गई है। दो हजार की आबादी वाले इस गांव में करीब 1238 मतदाता हैं। वर्ष 2015 में हुए परिसीमन से पहले यह गांव सहजी ग्राम पंचायत का मजरा हुआ करता था। परिसीमन से पहले वर्ष 2005 में जंगपाल सिंह की पत्नी ऊषा प्रधान रह चुकी हैं। वर्ष 2010 में जंगपाल सिंह ने कांटे के मुकाबले में संग्राम सिंह से 25 वोटों से हराकर प्रधानी चुनाव जीता था। 2015 में परिसीमन के चलते सांवतखेड़ी अलग पंचायत बनी तो मतदाताओं ने जंगपाल सिंह को निर्विरोध अपना मुखिया चुन लिया। वर्ष 2020 के चुनाव में सांवतखेड़ी ग्राम पंचायत अनुसूचित जाति के उम्मीदवार के लिए आरक्षित हुई। जंगपाल सिंह यहां भी पीछे नहीं रहे। उन्होंने अपने विश्वस्त बंटाईदार पप्पू को मैदान में उतारा और जीत भी दर्ज कराई। इस योजना में वह खुद प्रधान प्रतिनिधि बनकर काम कर रहे हैं।
-
यह बोले पूर्व प्रधान
पूर्व प्रधान व वर्तमान प्रधान के प्रतिनिधि जंगपाल सिंह का कहना है कि पप्पू हमारे परिवार के सदस्य जैसा है, जो करीब 20 साल से साथ है। हमारा मकसद गांव में विकास कार्य कराना है। इस बार भी चुनाव की तैयारी कर रहे हैं।
ग्राम प्रधान पप्पू का कहना है कि उनके कम पढ़े लिखे होने के कारण जंगपाल सिंह ही विकास संबंधित सभी काम काज देखते हैं। इससे कोई आपत्ति नहीं है। कभी सोचा भी नहीं था कि प्रधान की कुर्सी मिलेगा। घर में पत्नी अनिता और तीन बेटे हैं। बड़े बेटे की शादी हो चुकी है और बेटे पढ़ाई रहे हैं। बेटी हिमानी दसवीं की छात्रा है।
-