सहारनपुर। घर-घर बप्पा विराजमान हैं। बप्पा को विदाई देने के लिए इस बार श्रद्धालु विशेष तैयारी कर रहे हैं। बाजार में मिलने वाले प्रसाद से परहेज है। बात पर बप्पा पर अर्पित करने वाले मोदक पर आई तो महिलाओं को घर की रसोई ही भा रही है। महिलाएं घर ही प्रसाद तैयार कर रही है।
बाजार में मिलने वाली मिठाइयों में मिलावट की खबरें आती ही रहती हैं। ऐसे में यह भी पता नहीं होता की प्रसाद आदि के लिए बनने वाली मिठाई को बनाने में किस सामग्री का इस्तेमाल किया गया है, साथ ही बनाने वाले शुद्धता का खास ख्याल रखा भी हैं या नहीं। ऐसे में पिछले कुछ समय से महिलाएं अपने घरों पर मिठाई से लेकर प्रसाद को बना रही है। बप्पा का आगमन 27 अगस्त को घरों और मंदिरों में हुआ था। नौ दिन घरों में स्थापित रहने के बाद बप्पा का विसर्जन छह सितंबर को किया जाएगा। इसके लिए तैयारी की जा रही है। महिलाएं घरों में ही प्रसाद आदि बना रही है।
- बोलीं महिलाएं
- कुसुम धीमान ने बताया कि बप्पा को हर दिन अर्पित करने वाला भोग वह स्वयं बनाती हैं। पहले बाजार से मोदक और मिठाई भी मंगवाती थी, लेकिन मिलावट के डर के चलते वह अब घर पर ही प्रसाद बनाती है।
- मीना दत्त ने कहा कि प्रसाद को अर्पित करने के बाद हर कोई ग्रहण करता है। प्रसाद बनाने का तरीका भी शुद्ध होना चाहिए। इसलिए वह घर पर ही मोदक तैयार करती हैं।
- लता सिरोही ने बताया कि बाजार में मिलने वाले प्रसाद को कितनी शुद्धता के साथ बनाया गया है। इसका पता नहीं चल पाता। कई बार साफ और अच्छा दिखने वाली मिठाई भी खराब निकल जाती है। ऐसे में प्रसाद तो घर का ही अच्छा।
- आंचल शर्मा ने कहा कि बप्पा के मोदक बच्चों को भी पसंद आते हैं। ऐसे में उनका शुद्ध होना बहुत जरूरी है। बप्पा को मिलावटी प्रसाद थोड़े ही न अर्पित करेंगे।