लिंक नहर से माइनर में पानी न मिलने से क्षुब्ध किशनपुरा, घिसरपड़ी के ग्रामीणों ने शनिवार को चुनाव बहिष्कार की घोषणा के चलते दोनों गांव के मतदान केंद्रों पर एक भी मत नहीं पड़ा। गांव पहुंचे आला अधिकारियों ने ग्रामीणों को काफी समझाने बुझाने का प्रयास किया, लेकिन गुस्साए ग्रामीण पानी नहीं तो वोट भी नहीं, की अपनी जिद पर अड़े रहे।
शुक्रवार को किशनपुरा एंव घिसरपड़ी के ग्रामीणों ने बैठक कर सर्वसम्मति से 13 फरवरी को होने वाले देवबंद विधानसभा उपचुनाव का बहिष्कार करने का निर्णय लिया था। सुबह नौ बजे तक मतदान केंद्र संख्या 117 व 118 पर जब एक भी मतदाता अपना वोट डालने नहीं पहुंचा तो सरकारी अमले में हड़कंप मच गया।
सुबह करीब सवा नौ बजे सबसे पहले तहसीलदार कौशल कुमार और एसडीएम विभा चहल ने बात की, लेकिन लोग नहीं माने। इसी बीच दूसरे दौर की वार्ता मे एडीएम ओपी वर्मा व एसपी सिटी महेेंद्र सिंह ने बात की, मगर विफल रहे। बता दें कि जड़ौदापांड़ा क्षेत्र के जयपुर, किशनपुर, शेरपुर, घिसरपड़ी, उमरीमजबता, बालूमाजरा मौरा, हसनपुर लौटनी, मुश्कीपुर करीब दर्जनों गांव के किसानों को खेती करने के लिए 30-35 वर्ष पहले यमुना नहर से नन्हेड़ा माइनर के जरिये पानी की सप्लाई की जाती थी।
लेकिन, किसानों का आरोप है कि उन्हें गत 30 वर्षों से यमुना नहर से नन्हेड़ा माइनर को बिल्कुल भी पानी की सप्लाई नहीं मिल रही है, जबकि सिंचाई विभाग के अधिकारी हर वर्ष उक्त माइनर की खुदाई सफाई तो करवा देते है, लेकिन इसमें पानी की बूंद तक नहीं आती।
पर्ची पर हुआ विवाद
मतदान शुरू होने से पहले शब्बीरपुर गांव में महिला बीएलओ द्वारा मत पर्ची बांटने को लेकर दलितों के दो पक्षों के बीच जमकर विवाद हो गया। सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची दोनों पक्षों के दो लोगों को हिरासत में ले गई और दिनभर थाने पर बैठाए रखा। पीड़ित बीएलओ ने गांव के पांच लोगों पर मारपीट करने का आरोप लगाते हुए तहरीर दी। लेकिन, पुलिस ने तहरीर नहीं ली।