सहारनपुर। कोरोना संक्रमण के दौरान जनपद में कोविड अस्पताल बनाए गए थे। कुछ माह पूर्व संक्रमण बढ़ने की आशंका पर शासन स्तर से फिर वार्डों में वेंटिलेटर और अन्य व्यवस्थाएं दुरुस्त कराई गई। सभी उपकरण क्रियाशील कराए गए, लेकिन संक्रमण नहीं आने से उपकरणों का इस्तेमाल नहीं हुआ। इनका इस्तेमाल अन्य मरीजों पर भी नहीं हो रहा है। ऐसे में करोड़ों के वेंटिलेटर के प्रयोग में नहीं आने के कारण खराब होने की आशंका है।
पिछले साल कोरोना की चौथी लहर की आशंका के चलते शासन से कोविड अस्पतालों में व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे। उसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने कोविड अस्पतालों में तैयारियों को परखा। कोरोना मरीजों को भर्ती करने के लिए 1276 बेड तैयार किए गए। 14 ऑक्सीजन प्लांट चालू हुए। इसके साथ ही 939 ऑक्सीजन युक्त शामिल है। 124 बेड पर वेंटिलेटर की सुविधा दी गई। राजकीय मेडिकल कॉलेज और महिला अस्पताल 150 बेड के पीकू वार्ड में मॉकड्रिल से व्यवस्थाएं परखी गई थी। खास बात यह है कि कोविड और पीकू वार्ड खाली पड़े हैं। शासन स्तर से कोई निर्देश न मिलने से वार्ड दूसरे मरीजों के लिए प्रयोग नहीं किया जा रहा है।
पिछले साल कोरोना के नए वैरिएंट को लेकर कोविड वार्डों में व्यवस्थाएं दुरुस्त की गई थी। फतेहपुर सीएचसी में 50 बेड का कोविड वार्ड बनाया गया था। उक्त वार्ड में दूसरे मरीजों को भर्ती करने के लिए कह दिया है। महिला अस्पताल के पीकू वार्ड को लेकर शासन स्तर से कोई निर्देश नहीं मिले हैं। वेंटिलेटरों को समय-समय पर चेक किया जाता है।
-डॉ. संजीव मांगलिक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी