कैसे होती है हाइड्रोफोनिक खेती
केवीके प्रभारी डॉ. आईके कुशवाहा ने बताया कि हाइड्रोफोनिक खेती इजराइल की तकनीक पर आधारित है। इसमें मिट्टी की बजाए पानी का उपयोग पौधे के पोषण के लिए किया जाता है। इसमें एक चार इंच के पाइप में छेद कर पौधे क्ले बॉल्स या कोकोनट पिट के माध्यम से रोपे जाते हैं। इसमें आरओ के पानी को जड़ों के नीचे से गुजारा जाता है।
इसी पानी में जल विलेय पोषक तत्वों को डालकर पौधों की खुराक को पूरा किया जाता है। पानी को पाइप में टुल्लू पंप की सहायता से चलाया जाता है। जो वापस वाटर स्टोर में चला जाता है। इस प्रकार पानी पाइप में घूमता रहता है। इस विधि में कीटनाशक दवाइयों का प्रयोग नहीं किया जाता। पानी के माध्यम से खुुराक ग्रहण कर पौधे तेजी से बढ़ते हैं।
गिफ्ट के लिए बनाया फ्लावरिंग पॉट
हाइड्रोफोनिक खेती के लिए बच्चों को जागरूक करने के लिए विकास सिंह ने फ्लावरिंग पॉट भी तैयार किया है। उनका कहना है कि इसे बर्थ डे आदि पर गिफ्ट देकर बच्चों आदि को इस तकनीक के प्रति प्रेरित किया जा सकता है। उनके पास राजस्थान के सीकर जिले के एक स्कूल से इसके एक मॉडल बनाने की मांग भी आ चुकी है।
कम स्थान की आवश्यकता
विकास सिंह का कहना है कि हाइड्रोफोनिक खेती को मल्टी लेयर किया जा सकता है। इसके लिए सिर्फ एक बार सेटअप बनाने के बाद सिर्फ पानी और पोषक तत्वों का खर्च रहता है। इसको छत पर आसानी से लगाया जा सकता है। महानगरों में भी इस तकनीक का प्रयोग कर लोग घर में ताजी सब्जियां उगा सकते हैं।