फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उत्तराखंड के डीजीपी की गाड़ी बन गई स्कूली वाहन

Tue, 08 May 2018 11:54 PM IST
ब्यूराो, अमर उजाला/सहारनपुर
विज्ञापन
पकड़ी गई डीजीपी उत्तराखंड की कार। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
सहारनपुर में उत्तराखंड के डीजीपी के नाम की गाड़ी में स्कूली बच्चों को लाया जा रहा था। आरटीओ एवं पुलिस ने वाहन चेकिंग के दौरान रोका तो हड़कंप मच गया। टाटा सूमो गाड़ी के आगे और पीछे पुलिस का लोगो लगा हुआ था और गाड़ी में बच्चे ठूंस-ठूंस कर भरे हुए थे।
विज्ञापन


आरटीओ ने जांच की तो पता चला कि चालक ने नीलामी में गाड़ी खरीद ली, लेकिन रौब गालिब करने के लिए गाड़ी को अपने नाम ट्रांसफर ही नहीं कराया था। मंगलवार को सुबह आरटीओ कार्यालय के अधिकारी अंबाला रोड पर स्कूली वाहनों के फिटनेस की चेकिंग कर रहे थे।

इसी दौरान एक टाटा सूमो बच्चों को भरकर स्कूल ले जाती हुई नजर आई। इस गाड़ी पर आगे और पीछे पुलिस लिखा हुआ था और उस पर उत्तराखंड का नंबर था। बच्चों से भरी गाड़ी देखकर अधिकारियों ने चेकिंग के लिए रुकवाया।
विज्ञापन


अधिकारियों ने सबसे पहले गाड़ी के नंबर को इंटरनेशनल रजिस्ट्रेशन एप पर सर्च किया। परिणाम आते ही अधिकारियों में हड़कंप मच गया। जिस गाड़ी को अधिकारियों ने बच्चे ढोते हुए पकड़ा वह गाड़ी उत्तराखंड के डीजीपी के नाम पर पंजीकृत मिली। इस गाड़ी को कोतवाली क्षेत्र के काजीपुरा निवासी कामिल चला रहा था।

जब उससे सख्ती से पूछताछ की गई तो उसने गाड़ी को लगभग दो साल पहले नीलामी में खरीदने की जानकारी दी। उसने बताया कि गाड़ी को इसलिए अपने नाम नहीं कराया, जिससे कोई गाड़ी को रोके नहीं, रौब गालिब करने के लिए उसने पुलिस लिखा हुआ भी नहीं हटवाया। 

 डीजीपी के नाम पंजीकृत है गाड़ी
यात्री कर अधिकारी राकेश मोहन ने बताया कि पकड़ी गई टाटा सूमो उत्तराखंड के डीजीपी के नाम पर रजिस्टर्ड है। जब इसे नेशनल रजिट्रेशन एप पर सर्च किया तो उत्तराखंड के डीजीपी एक नाम पर गाड़ी पंजीकृत पाई गई।  

50 हजार का किया चालान
यात्री कर अधिकारी राकेश मोहन ने बताया कि बिना अनुमति, बिना फिटनेस, निजी वाहन को कॉमर्शियल वाहन में चलाया जा रहा था। चालान तो मौके पर मिले चालक के नाम ही किया गया है। जबकि पंजीकृत वाहन स्वामी के नाम पर डीजीपी उत्तराखंड का नाम लिखा गया है। जिसके चलते सभी धाराओं के तहत 50 हजार रुपये का जुर्माना किया गया है।  

 बिना फिटनेस के ही चलाई जा रही थी गाड़ी
पूछताछ में चालक कामिल ने बताया कि पुलिस लिखे होने के चलते किसी ने भी आज तक गाड़ी को नहीं रोका। बिना अनुमति, बिना फिटनेस, निजी वाहन को कॉमर्शियल में धड़ल्ले से चलाता रहा। 

 जिम्मेदारी खरीददार की 
उन्हें इस प्रकरण की पूरी जानकारी नहीं है। यदि पुलिस ने गाड़ी को नीलाम किया है तो तमाम कागजी कार्रवाई पूरी की गई है। वाहन को अपने नाम कराने की जिम्मेदारी खरीदार की है।
विज्ञापन

-। अनिल रतूड़ी, डीजीपी, उत्तराखंड
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें