सहारनपुर के गंगोह निवासी सुहैल की गिरफ्तारी के बाद उसकी पुरानी गतिविधियों, संपर्कों और दस्तावेजों की जांच तेज हो गई है। जांच एजेंसियां उसके कथित संपर्कों की पड़ताल कर रही हैं, जबकि आधार कार्ड में जन्मतिथि संबंधी दावों की जांच की मांग भी उठी है।
राम मंदिर को निशाना बनाने की कथित साजिश के मामले में गिरफ्तार गंगोह निवासी सुहैल की पुरानी गतिविधियों और संपर्कों की जांच तेज हो गई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि वह किन लोगों के संपर्क में आया और कथित रूप से कैसे इस मामले से जुड़ा। इस बीच उसके आधार कार्ड में जन्मतिथि से जुड़े दावों की जांच की मांग भी उठी है।
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कर्नाटक जाने से पहले चलाता था ई-रिक्शा
परिजनों के अनुसार सुहैल कर्नाटक जाने से पहले गंगोह में ई-रिक्शा चलाकर परिवार की आर्थिक मदद करता था। उसने कुछ समय दिल्ली में अपने भाई के साथ रहकर हौजरी का काम सीखा था। इसके अलावा चाय की दुकान पर भी काम किया और शामली में भी ई-रिक्शा चलाया। छह जून को वह अपने बड़े भाई के साथ एक ठेकेदार के माध्यम से कर्नाटक गया, जहां वह पुताई के कार्य में सहायक के रूप में मजदूरी कर रहा था।
जांच एजेंसियां उसकी पुरानी गतिविधियों और संपर्कों की पड़ताल कर रही हैं। पुलिस ने उसके परिजनों से पूछताछ की है और घर व आसपास के लोगों से भी जानकारी जुटाई है। हालांकि अधिकारियों की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है।
परिजनों का दावा- बैंक खाता और पैनकार्ड भी नहीं
सुहैल के पिता लियाकत का कहना है कि परिवार मजदूरी करके जीवन यापन करता है। उनका दावा है कि सुहैल के नाम न तो कोई बैंक खाता है और न ही उसका पैनकार्ड बना है। उन्होंने यह भी कहा कि करीब एक माह पहले ही किस्तों पर उसके लिए मोबाइल खरीदा गया था। गिरफ्तारी के बाद पिता और बहन की तबीयत बिगड़ गई, जिनका निजी अस्पताल में उपचार कराया गया।
परिजनों के अनुसार शुक्रवार को अधिकारियों ने बड़े भाई के अनुरोध पर करीब पांच मिनट के लिए सुहैल की फोन पर बात कराई। उनका कहना है कि बातचीत के दौरान उसने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि उससे लगातार पूछताछ की जा रही है।
आधार कार्ड की जांच की उठी मांग
अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद और राष्ट्रीय बजरंग दल ने गंगोह पुलिस के माध्यम से जिलाधिकारी को ज्ञापन भेजकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। ज्ञापन में आरोपी के आधार कार्ड में जन्मतिथि बदले जाने के दावे की भी जांच कराने की मांग की गई है।
संगठन का कहना है कि यदि सरकारी दस्तावेज में जन्मतिथि बदलने का दावा सही पाया जाता है तो संबंधित जनसेवा केंद्र, एजेंट, संस्था या अधिकारी की भूमिका की भी जांच कर दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि कहीं इस प्रकार का कोई संगठित गिरोह अन्य लोगों के दस्तावेजों में भी अवैध परिवर्तन तो नहीं करा रहा।
जांच जारी, आरोपों पर अंतिम फैसला बाकी
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिनंदन सिंह ने बताया कि मामले की प्रत्येक गतिविधि पर बारीकी से नजर रखी जा रही है। मामले की जांच विभिन्न एजेंसियां कर रही हैं। सुहैल के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।