महापौर डॉ. अजय कुमार ने बुधवार को सीएलसी (शहरी आजीविका मिशन) कार्यालय पर छापा मारा। 2022 के बाद से रजिस्टर अपडेट नहीं मिला और बीच-बीच में खाली पेज छोड़े गए थे, जिससे आशंका है कि बैक डेट में भर्ती दिखाकर कर्मचारियों को रखा जाता होगा। साथ ही यह भी पता चला कि बिना अनुमति के कर्मचारियों को भर्ती किया जा रहा था। कई अन्य प्रमाण सामने आने के बाद महापौर ने पूरे मामले पर जांच बैठा दी है।
बीते कई वर्ष से नगर निगम में ठेका कर्मचारियों की भर्ती सीएलसी के माध्यम से हो रही है। महापौर ने बताया कि कई बार सूचना मिल चुकी थी कि सीएलसी के अधिकारी, निगम के कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर अपनी मर्जी से ठेका कर्मचारियों की भर्ती कर रहे हैं। इसके लिए कुछ दिन पहले जनमंच में साक्षात्कार भी लिए गए, जबकि नगर निगम की अनुमति के बिना सीएलसी किसी कर्मचारी की भर्ती नहीं कर सकती है।
उन्होंने बताया कि छापे के दौरान फोन कॉल की डिटेल खंगाली गई तो लेखा विभाग के एक अधिकारी के फोन नंबर मिले। जो संदेह के दायरे में है। कुछ ऐसे सुबूत भी मिले हैं, जिनसे यह साबित होता है कि चोरी छिपे भर्ती की जा रही थी, जो कि नियम विरुद्ध है। सीएलसी में मिला रजिस्टर भी 2022 के बाद से अपडेट नहीं मिला है। बीच-बीच में पेज खाली छोड़े गए थे, जिससे मालूम होता है कि बैक डेट में भर्ती दिखाकर नए लोग रखे जाते रहे होंगे।
महापौर ने बताया कि इस तरह की गड़बड़ी उन पात्रों के साथ धोखा है, जो योग्यता रखते हैं और आवेदन कर सकते थे। मामले में जांच बैठा दी गई है। इसमें जो भी अधिकारी या सीएलसी के अधिकारी जिम्मेदार होंगे उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।