वंदे मातरम को लेकर देश में राजनीतिक बहस के बीच कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वह राष्ट्रीय गीत का सम्मान करते हैं और उसके बजने के दौरान सम्मानपूर्वक खड़े भी रहेंगे, लेकिन अपनी धार्मिक मान्यताओं के कारण वंदे मातरम नहीं गाएंगे।
दिल्ली में मीडिया को दिए बयान में इमरान मसूद ने कहा कि उनका मजहब अल्लाह के अलावा किसी अन्य की वंदना या इबादत करने की अनुमति नहीं देता। संविधान में मिले धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार को जोड़ते हुए कहा कि किसी नागरिक से उसकी धार्मिक आस्था के मुताबिक जीवन जीने का अधिकार नहीं छीना जा सकता। वंदे मातरम को लेकर उनका रुख किसी तरह के अपमान या विरोध का नहीं है।
कहा कि किसी व्यक्ति की धार्मिक मान्यता और उसकी देशभक्ति को एक ही कसौटी पर नहीं परखा जा सकता। देश और संविधान का सम्मान करते हैं और अपनी देशभक्ति साबित करने के लिए किसी राजनीतिक दल से प्रमाण पत्र लेने की जरूरत नहीं है। भाजपा को लेकर कहा कि राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत जैसे संवेदनशील विषयों को राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।
ब्राह्मण संगठन ने जताया विरोध
अखिल भारतीय ब्राह्मण संगठन के मुख्य संयोजक विजय शर्मा ने सांसद इमरान मसूद के बयान पर विरोध जताया। कहा कि कुछ राजनेता झूठी प्रसिद्धि पाने के लिए ऐसी बयानबाजी करते हैं। वोट के समय ये सबसे पहले देवी-देवताओं के मंदिरों में चक्कर लगाते हैं, तिलक लगवाते हैं और प्रसाद भी चढ़ाते हैं, लेकिन लोगों की नजरों में आने के लिए इस तरह के बयान देते हैं।
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