देवबंद। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट के तलाकशुदा महिलाओं को गुजारा भत्ता दिए जाने के फैसले पर ऐतराज जताया है। इस मामले पर रुख साफ करते हुए कहा कि वह इसमें कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। इस पर उलमा ने भी बोर्ड का भरपूर समर्थन किया है। उलमा का कहना है कि इस मुद्दे पर बोर्ड का जो रुख होगा वह रुख उनका होगा।
सोमवार को मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए जमीयत दावतुल मुसलीमीन के संरक्षक व प्रसिद्ध आलिम-ए-दीन मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने कहा कि तलाकशुदा महिलाओं को गुजारा भत्ता दिए जाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर तमाम उलमा ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के साथ हैं। उन्होंने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और उलमा ने इसका गहराई से जायजा लिया। जिसके बाद यह बात साफ हुई कि यह सीधे तौर पर शरीयत में हस्तक्षेप है। मुसलमान शरीयत में किसी भी तरह के हस्तक्षेप को कबूल नहीं कर सकता। इसीलिए मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने यह निर्णय लिया है कि इसे कोर्ट में चैलेंज करेंगे और अपनी बात को कोर्ट के समक्ष रखेंगे।
तंजीम इत्तेहाद उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मौलाना मुफ्ती असद कासमी ने कहा कि मुसलमान शरीयत पर चलता है, कुरआन-ए-करीम की शिक्षा अमल करते हैं और मोहम्मद साहब के बताए रास्ते पर चलते हैं। तलाकशुदा महिलाओं को गुजारा भत्ता देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर जो रुख ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का है। हम भी उनके रुख के साथ हैं। बोर्ड के हर फैसले पर हम उसके साथ कदम से कदम मिलाकर खड़े हैं। कहा कि बोर्ड और मुल्क के उलमा का इस मुद्दे पर जो भी रुख है। तंजीम इत्तेहाद उलमा-ए-हिंद का भी वही रुख है।