देवबंद। कांवड़ यात्रा के मद्देनजर दुकानों के बाहर बड़े अक्षरों में दुकानदारों के नाम लिखे जाने के पुलिस प्रशासन के निर्णय पर बहस शुरू हो गई है। मुस्लिम समाज इसे हिंदू-मुस्लिमों के बीच दूरियां बढ़ाने वाला फैसला करार दे रहा है, जबकि हिंदू संगठन इसको स्वागत योग्य बताते हुए इसकी सराहना कर रहे हैं।
बृहस्पतिवार को दारुल उलूम अशरफिया के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती सालिम अशरफ कासमी ने कहा कि हम सब हजरत आदम की औलाद हैं बाद में आस्थाएं बदल गईं। दुकानों के बाहर नाम लिखने से हिंदू मुस्लिमों के बीच दूरियां बढ़ेंगी। इसलिए हम इसका विरोध करते हैं। कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान मुस्लिम भाई कांवड़ियों की सेवा करते हैं। नाम लिखने के बाद ताअस्सुब (द्वेष भावना) रखने वाले उनसे बचेंगे। इस तरह के फरमान बंटवारे का फार्मूला है, मोहब्बत का नहीं। बजरंग दल नेता विकास त्यागी ने प्रशासन के इस निर्णय को स्वागत योग्य करार देते हुए कहा कि इसे सख्ती के साथ लागू करना चाहिए। क्योंकि इस निर्णय से सांप्रदायिक घटनाओं पर अंकुश लगेगा। जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं।
वे राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं। तंजीम इत्तेहाद उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मौलाना मुफ्ती असद कासमी का कहना है कि प्रशासन का यह फैसला सही नहीं है। बरसों से यह सिलसिला चला आ रहा है। कांवडि़यों पर मुस्लिम फूल बरसाते हैं और ईद पर हिंदू भाई उनके घर आते हैं। प्रशासन का यह फैसला इस प्यार मोहब्बत को समाप्त करने वाला है। साथ ही इससे फिरकापरस्त सोच रखने वालों को भी एक वर्ग विशेष को टारगेट करने का मौका मिलेगा।