मौलाना मुफ्ती असद कासमी
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इत्तेहाद उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती असद कासमी का कहना है कि पुस्तक बहीश्ती जेवर दारुल उलूम के पाठ्यक्रम में शामिल ही नहीं है और न ही दारुल उलूम इसका प्रकाशन कराता है। पुस्तक में इस तरह की कोई बात नहीं है जैसा कि मानुषी सदन की और से आरोप लगाया है।
उन्होंने कहा कि यहां ये बताना जरुरी है कि मजहब-ए-इस्लाम नाबालिग के साथ शादी में यहां तक हुक्म देता है कि अगर किसी वजह से नाबालिग की शादी कर दी गई तो बालिग होने के बाद लड़की को यह इख्तियार (हक) है कि चाहे तो वह उस शादी को अपनी रजामंदी के साथ में रखे या उसको खत्म कर दे। नाबालिग के साथ शादी करने को मजहब-ए-इस्लाम नहीं कहता।
मुफ्ती असद कासमी ने कहा कि कुछ संस्थाएं ऐसी हैं, जो दारुल उलूम और इस्लाम को लेकर गलत टिप्पणी कर उनको बदनाम करने की कोशिश कर रही हैं। ऐसी संस्थाओं के जिम्मेदारों को मशविरा है कि वह दारुल उलूम आए और इसके सिलेबस को देखें कि यहां क्या पढ़ाया जाता है। साथ ही वह इस्लामी तालीम, इस्लामी लॉ और शरीयत का बारीकी से अध्ययन करें।