सहारनपुर। महानगर में जमीन खरीदना महंगा हो गया है, जो जमीन दो दशक पहले औने-पौने दामों पर बिक रही थी। वह अब बेशकीमती हो गई है। महानगर के कई इलाकों में सर्किल रेट में 22 गुना तक वृद्धि हुई है। इसमें जेवी जैन कॉलेज रोड का क्षेत्र शामिल है। एक सितंबर को फिर से सर्किल रेट जारी करने की तैयारी चल रही है।
जमीनों के मूल्य को बाजार मूल्य के समतुल्य बनाने के लिए हर वर्ष सर्किल रेट में कुछ न कुछ बढ़ोतरी की जाती है। आमतौर पर औसतन दस से 12 फीसदी की वार्षिक वृद्धि होती है। जमीन के दामों में इतना अप्रत्याशित उछाल आया है कि महानगर के कुछ इलाकों में जमीन खरीदना काफी महंगा हो चला है। ऐसे में जो लोग इन पॉश इलाकों में अपने सपने का आशियाना बनाना चाहते हैं उन्हें जेब कुछ अधिक ही ढीली करनी पड़ रही है। यह स्थिति कोर्ट रोड से लेकर हसनपुर चौक और शक्ति पेट्रोल पंप तक है।
इसमें भी कुछ सेगमेंट के सर्किल रेट अधिक हैं। जेवी जैन डिग्री कॉलेज रोड पर वर्ष 2006 में सर्किल रेट आठ हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर थे, जो वर्तमान में 96 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर है। इसके अलावा कोर्ट रोड, कलक्ट्रेट से हसनपुर, हसनपुर से शक्ति पेट्रोल पंप आदि जगहों के दामों में वृद्धि हुई है। इसी तरह कॉलोनियों के सर्किल रेट में भी काफी बढ़ोतरी हुई है। इसमें भी शिवाजी नगर, दीप विहार, अहमद बाग, प्रद्युमन नगर आदि कॉलोनियां शामिल हैं।
नए सर्किल रेट तय करने की तैयारी अंतिम चरण में
पिछले वर्ष एक मई 2025 से जिलेभर में सर्किल रेट लागू हुए थे। इस वर्ष एक अप्रैल से सर्किल रेट लागू होने थे, लेकिन नए मानकों के चलते सर्किल रेट निर्धारित नहीं हो सके। स्टांप एवं पंजीयन विभाग के मुताबिक नए सर्किल रेट एक सितंबर से लागू करने की तैयारी है। इसे लेकर प्रस्तावित सूची तैयार की जा रही है।
पुराने और वर्तमान सर्किल रेट(प्रति वर्ग मीटर)
स्थानवर्तमान-पुराना(2006)
जैन कॉलेज रोड- 96 हजार रुपये-आठ हजार रुपये
कोर्ट रोड आवासीय - 1.38 लाख-22 हजार रुपये
अहमद बाग आवासीय - 1.65 लाख- 22 हजार रुपये
कलक्ट्रेट से हसनपुर आवासीय 1.40 लाख 20 हजार रुपये
हसनपुर से शक्ति पेट्रोल पंप आवासीय- एक लाखआठ हजार रुपये
शक्ति पेट्रोल पंप से पार्श्वनाथ आवासीय- 65 हजार रुपये-आठ हजार रुपये
सर्किल रेट को बाजारी भाव के समान बनाने के लिए हर वर्ष औसतन दस से 12 फीसदी वृद्धि सर्किल रेट में वृद्धि की जाती है। कुछ क्षेत्र पिछले वर्षों में काफी विकसित हुए हैं।
- बृजेश सिंह, सहायक महानिरीक्षक स्टांप