जैन मुनि श्री 108 तरुण सागर जी महाराज ने कहा कि आज लोग मकान, वस्त्र, यार दोस्त, नाते रिश्तेदार सबको बदल रहे हैं, लेकिन उसके बाद भी उनके मन को शांति नहीं है। क्योंकि, जब तक मनुष्य अपने आप को नहीं बदलेगा तब तक उसे चैन नहीं मिल सकता।
जैन मुनि तरुण सागर जी महाराज ने पीठ बाजार में एक दिवसीय प्रवचन के दौरान कहा कि आज बहू, सास और सास, बहू के आचरण को बदलने की लड़ाई लड़ रही हैं। लेकिन, जब तक वह दोनों अपने आप को नहीं बदलेगी घर में शांति नहीं हो सकती।
उन्होंने कहा कि भगवान महावीर ने कहा था कि लोग दूसरों को बदलने का प्रयास करते हैं, लेकिन जब तक वह अपने आप को नहीं बदलेगा जीवन में परिवर्तन, समृद्धि व उसका कल्याण नहीं हो सकता। हमारा जीवन स्वर्ग है, जन्नत है हम इसे साकार रूप तभी दे सकते हैं जब हम दिल को ठंडा, दिमाग को नरम, सोच को सुंदर, व्यवहार को सादगी पूर्ण नहीं बना लेते।
उन्होंने कहा कि धर्म हमारी आत्मा से जागृत होता है और जब आत्मा जागृत होती है, तभी संस्कार ईमानदारी शरीर में वास कर जाती है। उन्होंने कहा कि दोहरे चरित्र से बचना चाहिए जैसे एक ओर मानव शराब व तामसी चीजों का सेवन कर रहा है, जबकि दूसरी ओर पानी को छानकर पी रहा है। बहरूपिए पन से बचना चाहिए। उन्होंने पंडाल में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं का आह्वान किया कि जब वह अपने घर जाए तो परिवार के लोगों को लगना चाहिए कि वह गंगा स्नान करके आए हैं तभी सत्संग सुनने का उन्हें लाभ मिल सकता है।
इस मौके पर जैन समाज के अलावा अन्य समाज के लोगों ने भी जैन मुनि से आशीर्वाद लिया। इस दौरान विनोद जैन, संतोष कुमार जैन, नगर पंचायत चेयरमैन पूनम चौधरी, प्रदीप चौधरी, चौधरी नक्षत्र पाल पंवार, रमेश कुमार जैन, गोलू जैन, भूपेंद्र जैन, अलोक कुमार जैन, निपुण जैन, हर्ष जैन, नरेश चंद्र जैन, विनित जैन, सतेंद्र जैन, पवन जैन आदि ने महाराज को श्रीफल भेंट किया।