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500 रुपये में किराए पर रहने वालों के खातों से लाखों का लेनदेन

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सहारनपुर। पांच साल, पांच बैंक खाते, सात देश और लाखों रुपये की विदेशी फंडिंग के तार तलाशने के लिए एटीएस और अन्य जांच टीमें लखनऊ से सहारनपुर तक अलग-अलग स्तर पर पड़ताल कर रही हैं। वर्ष 2015 से लेकर अब तक फर्जी दस्तावेजों के सहारे बांग्लादेशी मो. इकबाल और फारुख विदेश के किन किन लोगों के संपर्क में रहे, इसकी छानबीन की जा रही है। जांच के मुख्य बिंदु दोनों भाइयों के पांच बैंक खाते भी हैं। 500 रुपये महीने के कमरे में किराए पर रहने वालों के खातों से तीन साल के अंदर ही लाखों रुपये की ट्रांजेक्शन की बात कही जा रही है।
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एटीएस की पूछताछ और अन्य छानबीन के स्तर पर यह बात हैरान कर रही है कि 500 रुपये के किराए के कमरे में रहने वाले परिवार के इन नागरिकों के पास पांच बैंक खाते और इनमें लाखों रुपये की राशि जमा करने की स्थिति कैसे बन रही है। यह मेहरबानी विदेशी फंडिंग की है या किसी अन्य स्रोत की, इसकी जांच जारी है। अधिकारिक रूप से तो ट्रांजेक्शन की कोई डिटेल नहीं दी जा रही है, मगर माना जा रहा है कि दो तीन साल में 80 लाख से अधिक का ट्रांजेक्शन हुआ है। जांच से जुड़ेे सूत्रों के मुताबिक बांग्लादेश नागरिकों के खाते प्रमुख बैंक एबीआई, पीएनबी, यूको और कोटेक महेंद्रा जैसे बैंकों के हैं।
तीन साल में जुटा लिए जरूरी दस्तावेज
- दोनों बांग्लादेशी नागरिक भाइयों ने तीन साल के अंदर ही जरूरी दस्तावेज जुटा लिए। इनमें पासपोर्ट दो साल पहले 20 अगस्त 2018 का बताया जा रहा है। इससे पहले वर्ष 2015 में फर्जी पासपोर्ट से देश की सीमा में प्रवेश की बात सामने आ रही थी। वहीं, जाति और आय प्रमाणपत्र इसी साल के बताए जा रहे हैं। इन्हें तैयार करने में फर्जी सूचनाओं और दस्तावेजों की पड़ताल अभी टीमें कर रही हैं।
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इन देशों के संपर्क खंगाल रही एटीएस
- एटीएस की जांच टीमें इन बांग्लादेशी नागरिकों के बांग्लादेश के अलावा सऊदी अरब, अमेरिका, इटली, ब्रिटेन, आस्ट्रिया, म्यांमार सहित अन्य लोगों के साथ इनके संपर्कों को खंगाल रही है। इन संपर्कों में खातों में लेनदेन के लिंक से लेकर राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल होने के मंसूबों तक की आशंकाओं का सच जानने की कोशिश की जा रही है। दो साल में बाहरी देशों में 35 से अधिक कॉल होने के साथ ही डिपोट होने के बाद देश में प्रवेश करने के बाद भी लगातार संपर्क में रहने की बातें सामने आ रही हैं।
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