जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी का बयान
संवाद न्यूज एजेंसी
देवबंद। जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने देश के वर्तमान हालत पर चिंता जताते हुए कहा कि यह वह आजादी नहीं है। जिसका सपना हमारे बड़े बुजुर्गों ने देखा था।
मौलाना अरशद मदनी ने स्वतंत्रता दिवस पर देशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि पहले हमने देश की आजादी के लिए बलिदान दिया था और अब आजादी की रक्षा को बलिदान देना होगा। कहा कि मुल्क की आजादी ही नहीं बल्कि कोई भी तारीख उलमा व मुसलमानों के उल्लेख के बिना मुकम्मल नहीं हो सकती है। मौलाना मदनी ने कहा कि हमारे बुजुर्गों ने देश की आजादी का शंख तब फूंका था जब दूसरे समुदाय सो रहे थे, लेकिन अफसोस की बात है कि जिन मुस्लिमों ने सबसे पहले वतन की आजादी का नारा दिया, आज उसी कौम को देशद्रोही कहा जा रहा है। ऐसा वह लोग कर रहे हैं जिन्होंने देश की आजादी में न तो कोई योगदान दिया और न ही उन्हें देश से मोहब्बत है। बल्कि वह देश को बरबाद करने के लिए नफरत की राजनीति कर रहे हैं।