फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विद्यालयों में है जलभराव, नौनिहालों को चपेट में न ले ले संचारी रोग

विज्ञापन
उच्च प्राथमिक विद्यालय में हुआ जलभराव में पलते मच्छर - फोटो : SAHARANPUR
विज्ञापन
सहारनपुर। कोरोना से बचाव के इंतजाम के साथ विद्यालय पहुंच रहे नौनिहालों पर संचारी रोगों का खतरा मंडरा रहा है। बरसात की वजह से ज्यादातर सरकारी विद्यालयों में जलभराव की समस्या है। इसकी वजह से परिसरों में घास उग आई है, जिसमें मच्छर पैदा हो रहे हैं। ऐसे में बच्चों की सेहत पर खतरा बना हुआ है।
विज्ञापन

जनपद में 1438 परिषदीय विद्यालय हैं। 99 फीसदी विद्यालयों में सफाई के लिए सफाई कर्मी नहीं हैं। देहात के विद्यालयों में देहात में लगे सफाईकर्मियों से सफाई कराने का प्रावधान है, मगर ऐसा होता नहीं है। शहरी क्षेत्र में भी ज्यादातर विद्यालय परिसरों का यही हाल है। ऐसी स्थिति में बरसात के दिनों में ज्यादातर विद्यालयों में जलभराव की वजह से घास उग आई है। जलभराव और नमी की वजह से मच्छर पैदा हो रहे हैं, जिनसे शिक्षक और बच्चे दोनों परेशान हैं। चूंकि जनपद में डेंगू के मामले सामने आ चुके हैं, ऐसे में नौनिहालों को डेंगू, मलेरिया आदि से बचाने की जरूरत है, जिसके लिए जरूरी है विद्यालयों में नियमित रूप से सफाई, पानी की निकासी और फॉगिंग कराने की। ऐसी ही हालत माध्यमिक विद्यालयों की भी है। बड़े परिसर होने की वजह से नियमित रूप से साफ-सफाई नहीं हो पाती है, जिसकी वजह से विद्यालयों में जलभराव है। शौचालयों की भी हालत ज्यादा ठीक नहीं है।
संचारी रोगों से बचाव के इंतजाम नहीं
कोरोना की वजह से विद्यालय करीब डेढ़ साल तक बंद रहे हैं। छोटे बच्चे यानी प्री-नर्सरी से आठवीं तक के बच्चे डेढ़ साल बाद ही विद्यालय पहुंच रहे हैं। कोरोना से बचाव के लिए विद्यालय स्तर पर सैनिटाइजेशन, मास्क की अनिवार्यता, हैंड सैनिटाइजेशन, सोशल डिस्टेंसिंग आदि पर ध्यान दिया जा रहा है। अभिभावक भी बच्चों को बचाव की तैयारी के साथ भेज रहे हैं। संचारी रोगों की ओर किसी का ध्यान नहीं है।
विज्ञापन

संचारी रोगों से बचाने को यह करें
- बच्चे को पूरी आस्तीन की शर्ट, पैंट औ मोजे पहनाकर ही स्कूल भेजें।
- मच्छरों को काटने से रोकने के लिए बाजार में क्रीम और जेल उपलब्ध हैं उनका इस्तेमाल करें।
- विद्यालयों की ओर से कक्षाओं में मच्छर भगाने के लिए क्वाइल आदि का इस्तेमाल किया जा सकता है।
- विद्यालयों की खिड़कियों और वेंटीलेशन पर जाली लगाई जाए, जिससे मच्छर प्रवेश न करें।
- विद्यालय परिसरों में जलभराव वाले स्थान पर नियमित रूप से एंटी लार्वा का छिड़काव और फॉगिंग कराई जाए।

उच्च प्राथमिक विद्यालय में हुआ जलभराव में पलते मच्छर- फोटो : SAHARANPUR

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें