नकुड़। परिवहन की सुविधा को बेहतर बनाने के लिए भले ही तमाम दावे किए जाते हों, लेकिन नकुड़ ऐसा तहसील मुख्यालय है जहां पर बस स्टैंड ही नहीं है। रोडवेज और प्राइवेट बसें सड़कों पर खड़ी होकर यात्रियों को बैठाती और उतारती हैं। जिससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है और जाम की स्थिति बनी रहती है।
तहसील मुख्यालय होने के बावजूद नगर में बस स्टैंड न होना बड़ी समस्या है। नकुड़ से सहारनपुर व गंगोह जाने वाली बसें सड़क के दोनों ओर खड़ी रहती हैं तो सरसावा को जाने वाली बस भी इससे कुछ ही दूरी पर चुंगी के समीप ही खड़ी होती है। इन्हीं बसों के आसपास डग्गामार वाहन भी खड़े रहते हैं। इसके अलावा हरियाणा लक्कड़ मंडी में जाने वाली लकड़ियों से लदी ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्राॅलियों को भी उनके चालक यहीं खड़ा कर देते हैं। इनकी वजह से यहां हर समय जाम की स्थिति बनी रहती है। क्षेत्रवासियों अभय सिंह एडवोकेट, पूरण चंद भगत, विश्वास कुमार व पीयूष जैन आदि ने बताया कि क्षेत्रवासी वर्षों से शासन व जनप्रतिनिधियों से समस्या के समाधान के लिए कस्बे में बस स्टैंड की स्थापना की मांग करते चले आ रहे हैं, लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है।
नकुड़ में बस स्टैंड की स्थापना कराना उनकी प्राथमिकता में है। वह इसके लिए शुरू से ही प्रयासरत हैं। बस स्टैंड के लिए जैसे ही जमीन उपलब्ध होगी तो सरकार से मंजूरी कराकर स्थापना करा दी जाएगी।
मुकेश चौधरी, विधायक
बस अड्डे की स्थापना के लिए वह लगातार प्रयास कर रहे हैं। बस अड्डे के निर्माण के लिए कस्बे के पास एक जमीन की बात चल रही है। जैसे ही जमीन की बात पक्की होगी निर्माण कार्य के लिए शासन से मंजूरी लेकर निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
- शिव कुमार गुप्ता, चेयरमैन,नगर पालिका परिषद, नकुड़
एडवोकेट अभय सिंह सैनी का कहना है कि नकुड़ में बस अड्डा न होने से यात्रियों को गर्मी, सर्दी व बारिश मे सड़क पर ही खड़े रहकर बस का इंतजार करना पड़ता है।
बस अड्डे के समीप मिठाई विक्रेता पूरण चंद भगत का कहना है कि बसें सड़क पर खड़ी रहने से अतिक्रमण को बढ़ावा मिलता है। इसके कारण सड़क पर जाम की स्थिति रहती है।
बस अड्डे पर इलेक्ट्रिक सामान विक्रेता विश्वास कुमार का कहना है कि बसों व डग्गामार वाहनों के सड़क पर खड़े रहने से हादसे होते रहते हैं और आए दिन जाम की स्थिति बनी रहती है।
गांव टाबर निवासी राजेंद्र सिंह राणा का कहना है कि तहसील मुख्यालय पर बस अड्डा न होना जनप्रतिनिधियों की विकास के प्रति उदासीनता को दर्शाता है। जिसका खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ता है।
मुकेश चौधरी, विधायक, नकुड़।
मुकेश चौधरी, विधायक, नकुड़।
मुकेश चौधरी, विधायक, नकुड़।
मुकेश चौधरी, विधायक, नकुड़।
मुकेश चौधरी, विधायक, नकुड़।