नकुड़। क्षेत्र के गांव जुड्डी में गांव की खुशहाली और पशुओं की सलामती के लिए प्रति वर्ष यज्ञ और भंडारे का आयोजन किया जाता है। इस आयोजन में गांव की सभी बिरादरी के लोग पूरी श्रद्धाभाव से शामिल होते हैं। खास बात यह है कि इस दिन पूरे गांव में चूल्हे पर तवा या कढ़ाई नहीं चढ़ाई जाती है। सभी लोग भंडारे में ही प्रसाद ग्रहण करते हैं। इसी माह 14 तारीख को यज्ञ और भंडारा होगा। गांव जुड्डी में यह परंपरा सदियों से चली आ रही है।
गांव के बुजुर्ग चौधरी हुकुम सिंह व पूर्व प्रधान चौधरी मोहर सिंह का कहना है कि यह आयोजन गांव के खेड़ा मंदिर पर भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के आसपास किसी भी शनिवार के दिन किया जाता है। मान्यता है कि खेड़ा महाराज गांव का बादशाह होता है और यदि गांव के खेड़ा महाराज प्रसन्न रहें तो गांव में कोई बीमारी या बुरा साया प्रवेश नहीं कर सकता है। इसीलिए खेड़ा महाराज को प्रसन्न करने के लिए ही सभी ग्रामीण यह आयोजन हर वर्ष कराते चले आ रहे हैं।
ग्राम प्रधान कृपाल सिंह व चौधरी राजपाल सिंह बताते हैं कि यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। इस आयोजन में गांव की सभी हिंदू बिरादरी के लोगों के साथ-साथ कुछ मुस्लिम पशुपालक भी अपना योगदान देते हैं। उन्होंने बताया कि जिस दिन यह आयोजन होता है, उससे एक दिन पूर्व शाम को गांव में मुनादी कराकर आयोजन के बारे में बताया जाता है और गांव की महिलाओं से इस दिन चूल्हे पर तवा या कड़ाही न चढ़ाने की अपील की जाती है।
सभी बिरादरी के लिए देते हैं खाद्य सामग्री
भंडारे के लिए सभी बिरादरी के लोग श्रद्धानुसार दूध, मीठा व चावल खेड़ा मंदिर पर भिजवाते हैं। इसी राशन से भंडारे का प्रसाद सभी ग्रामीणों द्वारा मिलकर बनाया जाता है। इस दिन गांव का कोई भी पशुपालक दूध नहीं बेचता है। पूर्व प्रधान जबर सिंह ने बताया कि यज्ञ से चार-पांच दिन पूर्व टीमें बनाकर प्रतिदिन गांव के हर घर व पशुशाला में जाकर गुग्गल व सामग्री की धूनी दी जाती है। आयोजन वाले दिन सुबह-सुबह पानी में दूध व गंगाजल मिलाकर पूरे गांव की परिक्रमा कर जल धारा छोड़ी जाती है।