सहारनपुर। जनपद में बुुखार का प्रकोप कम नहीं हो रहा। कई गांवों में ग्रामीण बुखार की चपेट में हैं। पिछले करीब डेढ़ महीने में बुखार से 10 से अधिक लोगों को मौत हो चुकी है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में बुखार से मौत नहीं है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब बुखार से मौत नहीं हुई तो ऐसी कौन सी बीमारी है, जिससे मौत हो रही।
जनपद में अभी भी सरकारी के साथ निजी अस्पतालों में बुखार पीड़ितों की भीड़ है। एसबीडी जिला अस्पताल की ओपीडी में ही प्रतिदिन बुखार के 50 से 60 मरीज आ रहे हैं। इससे बुरा हाल निजी अस्पतालों का है, जहां पर बुखार ग्रसित मरीजों की संख्या अधिक है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि जिन क्षेत्रों में बुखार से मौत हुई है, वहां जांच शिविर लगाए, साथ ही पता लगाया कि मौत का कारण क्या रहा। टीम ने मृतकों की जांच रिपोर्ट देखी और पता चला कि हार्ट अटैक, पीलिया और निमोनिया से मौत हुई है।
केस नंबर-1
बेहट क्षेत्र के गांव खुवाशपुर निवासी जुबैर (24) पुत्र सलीम को बुखार होने पर परिजनों ने प्राइवेट चिकित्सक के यहां दिखाया, लेकिन जब आराम नहीं मिला तो परिजनों ने जुबैर को हरियाणा के खिजराबाद अस्पताल में भर्ती कराया। जहां उसकी चार दिन पहले उपचार के दौरान मौत हो गई थी।
केस नंबर-2
नागल क्षेत्र के बसेड़ा निवासी प्रीतम की बेटी साक्षी को पांच दिन से लगातार बुखार आया। परिजनों ने उसका इलाज गांव में कराया। आराम नहीं मिला। शनिवार सुबह साक्षी की मौत हो गई थी।
केस नंबर-3
चिलकाना के पाज बांगर निवासी रतन सैनी को पिछले कई दिनों से बुखार आया। पहले परिजनों ने उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया। कई दिन आराम नहीं हुआ तो परिजन रतन को मुलाना अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसकी उपचार के दौरान मौत हो गई।
जनपद में बुखार के मरीज जरूर हैं, लेकिन अभी तक बुखार से कोई मौत नहीं हुई है। जिन गांवों में बुखार के मरीज मिलते हैं, वहां पर टीम भेजकर शिविर लगाया जाता है। जिन लोगों की बुखार से मौत हुई उनकी जांच रिपोर्ट में अन्य बीमारी जैसे पीलिया, हार्ट अटैक और निमोनिया होना पाया गया।
- शिवांका गौड़, जिला मलेरिया अधिकारी