-मंडलायुक्त ने दिए हैं चार साल के ठेकों के दस्तावेजों में लगे स्टांप की जांच के निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। नगर निगम के चार साल के तमाम ठेकों के दस्तावेजों में लगे स्टांप की जांच करने के लिए टीम बुधवार को नगर निगम पहुंची। टीम ने मुख्य कर निर्धारण अधिकारी के दफ्तर में बैठकर चार साल के दस्तावेजों को खंगाला। चर्चा है कि हाल ही के चर्चित पार्किंग ठेकों के स्टांप को छोड़कर पुराने सभी स्टांप सही पाए गए हैं।
स्टांप फर्जीवाड़ा का मामला बीते करीब 20 दिन से चर्चाओं में है। जिसमें ठेकेदार द्वारा पार्किंग के ठेकों के दस्तावेजों में लगाए गए ई-स्टांप फर्जी पाए गए हैं। जांच में उनके मूल्य और क्रेता मेल नहीं खा रहे हैं। इससे साबित होता है कि स्टांप फर्जी हैं, जिनमें कूटरचना की गई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए मंडलायुक्त हृषिकेश भास्कर यशोद ने नगर निगम पिछले सप्ताह नगर निगम के चार साल के तमाम ठेकों के दस्तावेजों के साथ लगे स्टांप की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। मंडलायुक्त के निर्देश पर सहायक महानिरीक्षक निबंधक की ओर से पिछले सप्ताह बुधवार को अपर नगरायुक्त को पत्र लिखकर जांच कराने को कहा था। मामले में टीम नगर निगम पहुंची और मुख्य कर निर्धारण अधिकारी के कार्यालय में करीब दो घंटे बैठकर चार साल के ठेकों में लगे स्टांप की जांच की।
24 घंटे बाद भी नहीं दर्ज हुई एफआईआर
सहारनपुर। सरकार के आदेश हैं कि थानों में आम नागरिक की एफआईआर तुरंत लिखी जाए, लेकिन यहां आम नागरिक तो दूर की बात नगरायुक्त जो कि आईएएस अधिकारी हैं के निर्देश पर दी गई तहरीर पर 24 घंटे बाद भी एफआईआर नहीं लिखी गई है। स्टांप प्रकरण में मंगलवार को नगरायुक्त संजय चौहान ने ठेकेदार के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। उनके निर्देश पर कर अधीक्षक सुरेंद्र सिंह थाना कुतुबशेर में तहरीर लेकर पहुंचे थे, लेकिन एफआईआर बुधवार की शाम चार बजे तक भी नहीं लिखी जा सकी थी। थाना प्रभारी का कहना है कि पुलिस पहले जांच करेगी उसके बाद एफआईआर दर्ज की जाएगी। निगम अधिकारियों ने भी इस पर नाराजगी व्यक्त की है। उधर, एसपी सिटी अभिमन्यु मांगलिक का कहना है कि मुकदमा दर्ज कराया जा रहा है।