सहारनपुर। रेलवे रोड स्थित नगर निगम की 46 दुकानों का स्वरूप बदल दिया गया। मामला संज्ञान में आने पर जिलाधिकारी ने जांच बिठाते हुए कई बिंदुओं पर जवाब मांगा। निगम की तरफ से दो बार जवाब दिए गए, लेकिन दोनों आधे-अधूरे। खुद कार्रवाई करने की बजाय लिखकर भेज दिया कि सदन ने अभी कोई निर्णय नहीं दिया। अब जिलाधिकारी की तरफ से तीसरी बार जवाब मांगा है। चेताया है कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की तो मामले को शासन में भेजा जाएगा।
दरअसल, रेलवे रोड पर नगर निगम की दुकानें हैं। इसमें 46 दुकानों का स्वरूप ही बदल दिया गया। कुछ समय पहले यह मामला उठा, जिसके बाद जिलाधिकारी की तरफ से जांच बिठाते हुए जवाब मांगा गया। इसके जवाब में नगर निगम ने कहा कि यह संपत्ति नगर निगम की है। किरायेदारी में यह दुकानें आवंटित की गई थी।
उक्त दुकानों के प्रथम तल पर ही दुकानदारों द्वारा दुकान निर्मित की गई है, जिसके संबंध में कार्रवाई के लिए सदन में लिखा गया है। नगर निगम के इस जवाब पर जिलाधिकारी की तरफ से आपत्ति जता दी गई। कई बिंदुओं पर सवाल उठाते हुए नगर निगम से दोबारा जवाब मांगा गया।
कहा कि किरायेदारों को अवैध रूप से दुकानें निर्माण करने का अधिकार था? नगर निगम की तरफ से कार्रवाई क्यों नहीं की गई। दुकानों का निर्माण किस अधिकारी के कार्यकाल में हुआ और उस पर क्या कार्रवाई की गई?
नगर निगम ने इस तरह की लीपापोती
जिलाधिकारी की आपत्ति के बाद नगर निगम ने फिर से गोलमोल जवाब दिया। जवाब में लिखा कि दुकानदारों को अवैध रूप से दुकान निर्माण करने का अधिकार नहीं था। यह आवंटन की शर्तों का उल्लंघन है। तर्क दिया कि कार्रवाई के लिए नवंबर 2023 में यह प्रकरण सदन की बैठक में रखा गया था, जिस पर अभी निर्णय नहीं हुआ है। किस अधिकारी के कार्यकाल में यह निर्माण कर दुकानों के स्वरूप बदले गए इसके जवाब में लिखा कि निर्माण कई वर्ष पूर्व हुआ है। ऐसे में यह स्पष्ट कर पाना मुश्किल है कि कौन अधिकारी उस समय कार्यरत थे। जिलाधिकारी की तरफ से इस पर सख्त आपत्ति जताई गई है।
वर्जन
यह बेहद गंभीर मामला है। निगम की तरफ से दो बार आधा-अधूरा जवाब आया। दोषियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई, इसका कोई उल्लेख नहीं है। तीसरी बार जवाब मांगा गया है। दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई तो शासन में मामला भेजा जाएगा। - मनीष बंसल, जिलाधिकारी