नानौता। श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास मनोज पाल जी महाराज ने द्रौपदी चीर हरण तथा राजा परीक्षित की कथा सुनाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
क्षेत्र के गांव डिग्गी में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में मनोज पाल जी महाराज ने बताया कि राजा परीक्षित ने गर्भ में ही श्रीमद्भागवत कथा सुनी थी। बताया कि राजा परीक्षित का जन्म हुआ और उनके जन्म के बाद जैसे ही उन्होंने भगवान श्री कृष्ण को देखा तो प्रसन्न हो उठे थे। मनोज पाल महाराज ने महाभारत में द्रौपदी के चीर हरण में भगवान श्री कृष्ण की महिमा का बखान करते हुए कहा कि कौरव तथा पांडव के बीच जुए का खेल हुआ। जिसमें पांडव हार गए थे। तब कौरवों द्वारा द्रौपदी का चीर हरण किया गया। द्रौपदी ने भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण किया। भगवान श्री कृष्ण द्रौपदी के वस्त्र बनकर खड़े हो गए। इस प्रकार भगवान श्री कृष्ण ने द्रौपदी की इज्जत बचाई। उन्होंने कहा कि सच्चे मन से भगवान का स्मरण करने से उनकी विपत्ति दूर हो जाती है। सभासद राजसिंह पाल सिंह, डा. के. पी. सिंह, राजेश पाल, ओमप्रकाश पाल, जयद्रथ पाल, नरेंद्र पाल, ज्ञान सिंह पाल, जोनू भगत, मुकेश धनगर तथा रजनी देवी रहे।