विज्ञान से लेकर उर्दू तक पढ़ा रहे पाठ
संस्था के संरक्षक डॉ. उमर सैफ का कहना है कि पिछले माह अस्थायी स्कूल शुरू किया है। करीब तीन किमी सूखी नदी से होते हुए संस्था के सदस्य रोजाना सुबह वहां पहुंचते हैं। जिसमें मास्टर अमजद अली, डॉ. सोनू कुमार, नाजिम अली और मुस्तफा अली शामिल है। जो विज्ञान से लेकर उर्दू की तालीम भी देते हैं। अन्य लोगों को भी इसमें सामने आना चाहिए।
वन गुर्जर भी चाहते हैं शिक्षित बने बच्चे
घास-फूस की झोपड़ी में चार बच्चे और पति के साथ रहने वाली अफसाना का कहना है कि उसके परिवार में कोई भी पढ़ा-लिखा नहीं है। बकौल अफसाना, हमारी जिंदगी तो कट गई, लेकिन बच्चों को पढ़ाना चाहते हैं।
इनका कहना है कि कम से कम परिवार में कोई तो पढ़ा-लिखा होगा। बस स्कूल की सुविधा मिल जाए। राशिदा के भी तीन बच्चे हैं, जिनकी उम्र चार से 10 साल के बीच है। राशिदा भी चाहती है कि यदि पढ़ाई-लिखाई की सुविधा मिले तो अपने बच्चों को जरूर शिक्षित करेगी।
यह बोले अधिकारी
वन गुर्जरों के बच्चों को शिक्षित करने के लिए पहले भी प्रयास किए गए हैं और लगातार प्रयास जारी है। कुछ कारणों की वजह से समस्या आ रही है। उसे भी दूर किया जाएगा। उनकी हर संभव मदद की जाएगी। - डॉ. दिनेश चंद्र, जिलाधिकारी
शिक्षा सभी का अधिकार है। ऐसे बच्चों की मदद के लिए सभी को सामने आना होगा। इन बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में मदद के लिए जरूरी सामान उपलब्ध कराया जाएगा। जो भी मदद होगी वह की जाएगी। - डॉ. विपिन ताडा, एसएसपी
इनके दाखिले के लिए कई बार प्रयास किया गया। स्कूल दूर होने के कारण यह लोग सहयोग नहीं करते। जिनकी मांग रहती है कि उनके डेरों के आसपास स्कूल शुरू कर दिया जाए, जो संभव नहीं है। क्योंकि यह काफी दूर तक टुकड़ियों में बसे हुए हैं। - डॉ. कृपाल मलिक, जिला समन्वयक सामुदायिक सहभागिता