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रंग ला रहा अभियान : पहाड़ियों के सन्नाटे में गूंजने लगा ककहरा, वन गुर्जरों के डेरे में पहुंचा शिक्षा का उजियारा

Thu, 07 Dec 2023 01:46 PM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर

सार

पहाड़ियों की तलहटी में घास-फूस की झोपड़ियों में रहने वाले वन गुर्जरों के डेरे में शिक्षा का उजियारा हो रहा है। डेरे में जहां कई पीढ़ियां अशिक्षा के अंधेरे में जी रही थीं वहीं नई पीढ़ी साक्षरता अभियान के तहत शिक्षित हो रही है।
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शाकंभरी क्षेत्र में सहस्त्रा नदी के किनारे बसें वन गुर्जरों के बच्चों को पढ़ाते डॉ. उमर सैफ।
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विस्तार
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पहाड़ों के बीच जहां कभी सन्नाटा पसरा हुआ था, आज वहां पर क,ख,ग की आवाज गूंजने लगी है। इन मासूमों के जीवन में शिक्षा की जोत जगाने के लिए प्रयास तो पहले भी खूब हुए, लेकिन कोई प्रयास धरातल पर नहीं उतरा।

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हम बात कर रहे हैं सहारनपुर जनपद से कुछ किलोमीटर की दूरी पर पहाड़ियों की तलहटी में घास-फूस की झोपड़ियों में रहने वाले वन गुर्जरों की। जिनकी कई पीढि़यां अनपढ़ ही बीत गईं। दादा-परदादा से लेकर वर्तमान पीढ़ी भी साक्षरता से कोसों दूर है। यह हाल तब है जब बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ, सब पढ़े-सब बढ़े, स्कूल चलें हम के तमाम स्लोगन और नारे दिए जाते हैं। फिर भी सरकार की तरफ से इन्हें साक्षर करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाएं जा रहे।

इन मासूमों को शिक्षित करने के लिए संस्था मिशन लाइफ फाउंडेशन ने प्रयास किया है। सभी सदस्यों ने मिलकर पिछले माह सहंस्रा नदी के किनारे बसे वन गुर्जरों के बच्चों के लिए अस्थायी स्कूल शुरू किया है। जिसमें फिलहाल 49 बच्चों को पढ़ाया जा रहा है।
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वन गुर्जर - फोटो : Amar Ujala
विज्ञान से लेकर उर्दू तक पढ़ा रहे पाठ
संस्था के संरक्षक डॉ. उमर सैफ का कहना है कि पिछले माह अस्थायी स्कूल शुरू किया है। करीब तीन किमी सूखी नदी से होते हुए संस्था के सदस्य रोजाना सुबह वहां पहुंचते हैं। जिसमें मास्टर अमजद अली, डॉ. सोनू कुमार, नाजिम अली और मुस्तफा अली शामिल है। जो विज्ञान से लेकर उर्दू की तालीम भी देते हैं। अन्य लोगों को भी इसमें सामने आना चाहिए।

वन गुर्जर भी चाहते हैं शिक्षित बने बच्चे
घास-फूस की झोपड़ी में चार बच्चे और पति के साथ रहने वाली अफसाना का कहना है कि उसके परिवार में कोई भी पढ़ा-लिखा नहीं है। बकौल अफसाना, हमारी जिंदगी तो कट गई, लेकिन बच्चों को पढ़ाना चाहते हैं।

इनका कहना है कि कम से कम परिवार में कोई तो पढ़ा-लिखा होगा। बस स्कूल की सुविधा मिल जाए। राशिदा के भी तीन बच्चे हैं, जिनकी उम्र चार से 10 साल के बीच है। राशिदा भी चाहती है कि यदि पढ़ाई-लिखाई की सुविधा मिले तो अपने बच्चों को जरूर शिक्षित करेगी।
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यह बोले अधिकारी
वन गुर्जरों के बच्चों को शिक्षित करने के लिए पहले भी प्रयास किए गए हैं और लगातार प्रयास जारी है। कुछ कारणों की वजह से समस्या आ रही है। उसे भी दूर किया जाएगा। उनकी हर संभव मदद की जाएगी। - डॉ. दिनेश चंद्र, जिलाधिकारी

शिक्षा सभी का अधिकार है। ऐसे बच्चों की मदद के लिए सभी को सामने आना होगा। इन बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में मदद के लिए जरूरी सामान उपलब्ध कराया जाएगा। जो भी मदद होगी वह की जाएगी। - डॉ. विपिन ताडा, एसएसपी

इनके दाखिले के लिए कई बार प्रयास किया गया। स्कूल दूर होने के कारण यह लोग सहयोग नहीं करते। जिनकी मांग रहती है कि उनके डेरों के आसपास स्कूल शुरू कर दिया जाए, जो संभव नहीं है। क्योंकि यह काफी दूर तक टुकड़ियों में बसे हुए हैं। - डॉ. कृपाल मलिक, जिला समन्वयक सामुदायिक सहभागिता
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